Aukat Shayari in Hindi ॥ औकात शायरी

किसी का भला कितना ही कर लो, आखिर में वो अपनी औकात दिखा देता है।

किसी का भला कितना ही कर लो, आखिर में वो अपनी औकात दिखा देता है।

मुझ से मिलने मेरी औकात आई है, मकान कच्चा है और बरसात आई है।

मुझ से मिलने मेरी औकात आई है, मकान कच्चा है और बरसात आई है।

तेरी अकड़ देख ली मैंने, क्या ही बड़ी बात है, कुछ तो छूट मेरी दी है, वरना तेरी क्या औकात है।

तेरी अकड़ देख ली मैंने, क्या ही बड़ी बात है, कुछ तो छूट मेरी दी है, वरना तेरी क्या औकात है।

पैसा बहुत था पर वो अपनी औक़ात खो बैठा, अमीरी के फेर में जब पिता का साथ खो बैठा।

पैसा बहुत था पर वो अपनी औक़ात खो बैठा, अमीरी के फेर में जब पिता का साथ खो बैठा।

जो इन्तिकाम लेने उतरूँ मैं, तो अपनी कलम से तेरी औकात बता दूं।

जो इन्तिकाम लेने उतरूँ मैं, तो अपनी कलम से तेरी औकात बता दूं।

कोशिशे लाख आजमाई तुम्हारा साथ निभाने में, एक पल भी न लगा तुम्हे औकात दिखाने में।

कोशिशे लाख आजमाई तुम्हारा साथ निभाने में, एक पल भी न लगा तुम्हे औकात दिखाने में।

ख़्वाहिश तो मेरी भी होती है तुम्हें अपना बनाने की, मग़र तुम्हारे दीवार की ईंट भी मेरी औकात से ऊपर है।

ख़्वाहिश तो मेरी भी होती है तुम्हें अपना बनाने की, मग़र तुम्हारे दीवार की ईंट भी मेरी औकात से ऊपर है।

जरा संभल कर, कहीं तुम्हारी औकात तुम्हे, और नीचे न गिरा दे।

जरा संभल कर, कहीं तुम्हारी औकात तुम्हे, और नीचे न गिरा दे।

वो छोड़ के गए तो एक सबक सीखा गए, अबके कोई आये तो उसे औकात में रखा जाए।

वो छोड़ के गए तो एक सबक सीखा गए, अबके कोई आये तो उसे औकात में रखा जाए।

औकात तो उनकी मुंह लगाने की भी ना थी, हम तो उनसे दिल लगा बैठे थे।

औकात तो उनकी मुंह लगाने की भी ना थी, हम तो उनसे दिल लगा बैठे थे।

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