कुछ लोग इस तरह जीने का सलीका सिखाते है, औकात में रहूं इसीलिए औकात दिखाते है।

कुछ लोग इस तरह जीने का सलीका सिखाते है, औकात में रहूं इसीलिए औकात दिखाते है।

औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से, ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से।

औकात जो नाप रहे हो ज़ुबान की धार से, ज़रा ख़ुद में झाँक लो ज़मीर के दीदार से।

फिर हुआ यूं के घड़ी खोल के रख दी हमने, वक्त हर शख़्स की औकात बताये जा रहा था।

फिर हुआ यूं के घड़ी खोल के रख दी हमने, वक्त हर शख़्स की औकात बताये जा रहा था।

अपनी आँखों से लड़ कर जो हमने दिन रात देखा था, ऐसा औकात से बढ़ कर हम ने इक ख़्वाब देखा था।

अपनी आँखों से लड़ कर जो हमने दिन रात देखा था, ऐसा औकात से बढ़ कर हम ने इक ख़्वाब देखा था।

तेरी औकात ही क्या है मेरे इस दिल में बसने की, हम तो शायरी से लोगों की रुह में बस जाते हैं।

तेरी औकात ही क्या है मेरे इस दिल में बसने की, हम तो शायरी से लोगों की रुह में बस जाते हैं।

मैंने अपना ठिकाना नहीं बदला, आज भी अपनी औकात में रहता हूँ।

मैंने अपना ठिकाना नहीं बदला, आज भी अपनी औकात में रहता हूँ।

चीर दूंगा मेरे जख्मी पैरों से इन लंबे रास्तों को, वक्त मेरा बताएगा औकात इन हसीन चेहरों को।

चीर दूंगा मेरे जख्मी पैरों से इन लंबे रास्तों को, वक्त मेरा बताएगा औकात इन हसीन चेहरों को।

चीज़ों से पहचान हो रही है आदमी की, औकात अब हमारी बज़ार रहा है।

चीज़ों से पहचान हो रही है आदमी की, औकात अब हमारी बज़ार रहा है।

कभी जात कभी समाज तो कभी औकात ने लुटा, इश्क़ किसी बदनसीब गरीब की आबरू हो जैसे।

कभी जात कभी समाज तो कभी औकात ने लुटा, इश्क़ किसी बदनसीब गरीब की आबरू हो जैसे।

चलो हकीक़त से थोड़ी मुलाक़ात करते हैं, जितनी औकात बस उतनी ही बात करते हैं।

चलो हकीक़त से थोड़ी मुलाक़ात करते हैं, जितनी औकात बस उतनी ही बात करते हैं।

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