सुनो मेहबूबा, एक राय है, तुमसे बेहतर तो मेरी चाय है।

सुनो मेहबूबा, एक राय है, तुमसे बेहतर तो मेरी चाय है।

एक सुबह क्या कॉफी के नाम कर दी, चाय ने तो हमे बेवफा ही कह डाला।

एक सुबह क्या कॉफी के नाम कर दी, चाय ने तो हमे बेवफा ही कह डाला।

वो चाय बहुत अच्छी बनाती है, एक यही वजह काफी है,उससे मोहब्बत करने के लिए।

वो चाय बहुत अच्छी बनाती है, एक यही वजह काफी है,उससे मोहब्बत करने के लिए।

मोहब्बत है हमसे तो थोड़ा इज़हार करना सिख लो, प्यार है तो थोड़ा चाय बनाना भी सीख लो।

मोहब्बत है हमसे तो थोड़ा इज़हार करना सिख लो, प्यार है तो थोड़ा चाय बनाना भी सीख लो।

नाराज़गी आज उसने कुछ यूं जाहिर कर दी, चाय तो बनाई मगर दूर लेकर रख दी।

नाराज़गी आज उसने कुछ यूं जाहिर कर दी, चाय तो बनाई मगर दूर लेकर रख दी।

बहुत दुर मंज़िल है, थोड़ा आराम हो जाए, चलो दो पल साथ बिताते है, एक कप चाय हो जाए।

बहुत दुर मंज़िल है, थोड़ा आराम हो जाए, चलो दो पल साथ बिताते है, एक कप चाय हो जाए।

ये मुसीबत के दिन भी गुजर जायेगे, फिर एक मुलाकात रखेंगे चाय पर।

ये मुसीबत के दिन भी गुजर जायेगे, फिर एक मुलाकात रखेंगे चाय पर।

एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास, वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।

एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास, वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।

मोहब्बत तो लौटा नहीं सकते तुम, मगर वो चाय की महक तो लौटा दो।

मोहब्बत तो लौटा नहीं सकते तुम, मगर वो चाय की महक तो लौटा दो।

तुम से एकतरफा मोहब्बत कुछ इस तरह भी कर लेता हूँ, तुम्हारे हिस्से की भी चाय मैं पी लेता हूँ।

तुम से एकतरफा मोहब्बत कुछ इस तरह भी कर लेता हूँ, तुम्हारे हिस्से की भी चाय मैं पी लेता हूँ।

जैसे तारों के बिना चाँद अधूरा है, वैसे ही चाय के बिना मैं अधूरा हूं।

जैसे तारों के बिना चाँद अधूरा है, वैसे ही चाय के बिना मैं अधूरा हूं।

जब सुबह-सुबह तेरे प्यार के नग्में को गुनगुनाता हूं, लब मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूं।

जब सुबह-सुबह तेरे प्यार के नग्में को गुनगुनाता हूं, लब मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूं।

माँ के हाथ की बनी चाय पीये हुए कई साल गुज़र गए, चाय का वो स्वाद तो मिल गया लेकिन वो प्यार नहीं।

माँ के हाथ की बनी चाय पीये हुए कई साल गुज़र गए, चाय का वो स्वाद तो मिल गया लेकिन वो प्यार नहीं।

इस भागते हुए वक़्त पर कैसे लगाम लगाई जाए, ऐ वक़्त आ बैठ तुझे एक कप चाय पिलाई जाए।

इस भागते हुए वक़्त पर कैसे लगाम लगाई जाए, ऐ वक़्त आ बैठ तुझे एक कप चाय पिलाई जाए।

कभी हसाती है तो कभी गम के सागर में डुबा जाती है, वो चाय की टपरी अपनी ना होते हुए भी बहुत याद आती है।

कभी हसाती है तो कभी गम के सागर में डुबा जाती है, वो चाय की टपरी अपनी ना होते हुए भी बहुत याद आती है।

हम तो निकले थे मोहब्बत की तलाश में, सर्दी बहुत लगी चाय पीकर वापस आ गये।

हम तो निकले थे मोहब्बत की तलाश में, सर्दी बहुत लगी चाय पीकर वापस आ गये।

अक्सर मैं तेरे प्यार के नग़मे गुनगुनाता हूँ, होंठ मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूँ।

अक्सर मैं तेरे प्यार के नग़मे गुनगुनाता हूँ, होंठ मुस्कुराते है जब चाय का कप उठाता हूँ।

चाय की चुस्कियों में यादों को डुबाया करो, ये दुनिया की बातों को खामखां दिल से ना लगाया करो।

चाय की चुस्कियों में यादों को डुबाया करो, ये दुनिया की बातों को खामखां दिल से ना लगाया करो।

आज की रात कैसे गुजरी,ये मत पूछो सनम, एक तो तुम्हारी याद बहुत आई,ऊपर से चाय पत्ती खत्म।

आज की रात कैसे गुजरी,ये मत पूछो सनम, एक तो तुम्हारी याद बहुत आई,ऊपर से चाय पत्ती खत्म।

हर किसी ने ज़ख्म दिये है यहाँ, बस चाय ने ही ज़ख्मों पर मरहम लगाया है।

हर किसी ने ज़ख्म दिये है यहाँ, बस चाय ने ही ज़ख्मों पर मरहम लगाया है।

जागने की इजाज़त नही देते तेरे ख्वाब मुझे, वो तो मैं चाय का बहाना करके उठ जाया करता हूँ।

जागने की इजाज़त नही देते तेरे ख्वाब मुझे, वो तो मैं चाय का बहाना करके उठ जाया करता हूँ।

चाय पीने से फुर्सत नहीं मिलती, वरना हम बताते मोहब्बत किसे कहते हैं।

चाय पीने से फुर्सत नहीं मिलती, वरना हम बताते मोहब्बत किसे कहते हैं।

रोज़ सुबह चाय की तलाश में निकलता हूँ ऐसे, कोई रांझा ढूंढ रहा हो अपनी हीर को जैसे।

रोज़ सुबह चाय की तलाश में निकलता हूँ ऐसे, कोई रांझा ढूंढ रहा हो अपनी हीर को जैसे।

चाई की आदत से भी दूर रखा करते थे खुदको, यहां देखो, आहिस्ता आहिस्ता तुम्हारी लत लग गई।

चाई की आदत से भी दूर रखा करते थे खुदको, यहां देखो, आहिस्ता आहिस्ता तुम्हारी लत लग गई।

आशिको की आशिक़ी, वो यारों की यारी है, वो सिर्फ चाय नहीं, हमारी मुलाकात की पहली तैयारी है।

आशिको की आशिक़ी, वो यारों की यारी है, वो सिर्फ चाय नहीं, हमारी मुलाकात की पहली तैयारी है।

तारीफें बयां कर रहे थे लोग अपने अपने पसंदीदा जाम की, ख़ामोशी बसर हो गई महफ़िल में जब मिसाल दी मैंने चाय की।

तारीफें बयां कर रहे थे लोग अपने अपने पसंदीदा जाम की, ख़ामोशी बसर हो गई महफ़िल में जब मिसाल दी मैंने चाय की।

कल रात मैने एक हसीन ख्वाब देखा, खुद को चाय की टपरी पर तेरे साथ देखा।

कल रात मैने एक हसीन ख्वाब देखा, खुद को चाय की टपरी पर तेरे साथ देखा।

चाय की तरह मोहब्बत उसकी आज भी उबलती रहती है सीने में।

चाय की तरह मोहब्बत उसकी आज भी उबलती रहती है सीने में।

हाथ में चाय और यादों में आप हो, फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो।

हाथ में चाय और यादों में आप हो, फिर उस खुशनुमा सुबह की क्या बात हो।

कभी हमारे गाँव आओ, तुम्हें एक सैर कराएंगे, हमारी स्पेशल वाली चाय तुम्हें अपने हाथों से पीलायेंगे।

कभी हमारे गाँव आओ, तुम्हें एक सैर कराएंगे, हमारी स्पेशल वाली चाय तुम्हें अपने हाथों से पीलायेंगे।

मेरी चाय की चीनी और खाने का नमक हो तुम, कैसे तुम्हे समझाऊं की मेरे दिल की धडक हो तुम।

मेरी चाय की चीनी और खाने का नमक हो तुम, कैसे तुम्हे समझाऊं की मेरे दिल की धडक हो तुम।

ज़िन्हे चाय से लगाव होता है, उसके दिल में जरूर घाव होता हैं।

ज़िन्हे चाय से लगाव होता है, उसके दिल में जरूर घाव होता हैं।

कैसे कहे कोई नहीं है हमारा, शाम की चाय रोज बेसब्री से इंतज़ार जो करती है।

कैसे कहे कोई नहीं है हमारा, शाम की चाय रोज बेसब्री से इंतज़ार जो करती है।

मैं तुम्हें कुल्हड़ वाली चाय पिला सकता हूं, ये चांद तारे तोड़ के लाना सब फिजूल की बातें हैं।

मैं तुम्हें कुल्हड़ वाली चाय पिला सकता हूं, ये चांद तारे तोड़ के लाना सब फिजूल की बातें हैं।

फ़िर से एक बार किसी की खुशबू ने रूह को छुआ है, लगता है कहीं पर कुल्हड़ की चाय का ज़िक्र हुआ है।

फ़िर से एक बार किसी की खुशबू ने रूह को छुआ है, लगता है कहीं पर कुल्हड़ की चाय का ज़िक्र हुआ है।

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को, दूध से कहीं ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के।

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को, दूध से कहीं ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के।

कुछ इस तरह जी लेते है हम, तुम्हारी याद आने पर चाय पी लेते है हम।

कुछ इस तरह जी लेते है हम, तुम्हारी याद आने पर चाय पी लेते है हम।

सर दर्द सी हो गयी है जिंदगी, क्या तुम सुबह की चाय बनोगी।

सर दर्द सी हो गयी है जिंदगी, क्या तुम सुबह की चाय बनोगी।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

कुल्हड़ वाली चाय और भी ज्यादा स्वादिष्ट हो जाती है, मेरी भारत की मिट्टी की खुश्बू जो उसमे घुल जाती है।

कुल्हड़ वाली चाय और भी ज्यादा स्वादिष्ट हो जाती है, मेरी भारत की मिट्टी की खुश्बू जो उसमे घुल जाती है।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

मेरे चाय पीने का कोई वक़्त तो नहीं हैं, परंतु चाय पीते वक़्त तुम्हारी याद जरूर आती हैं।

ये चाय की मोहब्बत वो क्या जाने, हर एक घूँट में एक अलग ही नशा है।

ये चाय की मोहब्बत वो क्या जाने, हर एक घूँट में एक अलग ही नशा है।

इक प्याली चाय और ख्वाहिश तुम्हारी, सफर मुकम्मल करें यादें तुम्हारी।

इक प्याली चाय और ख्वाहिश तुम्हारी, सफर मुकम्मल करें यादें तुम्हारी।

कल मिलने का वादा है उनका और, मैं चाय लिए रोज़ इंतजार करता हूं।

कल मिलने का वादा है उनका और, मैं चाय लिए रोज़ इंतजार करता हूं।

तेरे इश्क़ में मुझे जीना है, तेरे होंठो से लगी चाय मुझे पीना है।

तेरे इश्क़ में मुझे जीना है, तेरे होंठो से लगी चाय मुझे पीना है।

हर रोज़ होता है मुझे इश्क़ तुमसे, तुम मेरी सुबह की पहली चाय से हो गए हो।

हर रोज़ होता है मुझे इश्क़ तुमसे, तुम मेरी सुबह की पहली चाय से हो गए हो।

तेरा इश्क़ चाय सा मीठा, मैं इसमे खोना चाहता हुँ, बिस्कुट सा डूब कर इसमे मैं तेरा होना चाहता हुँ।

तेरा इश्क़ चाय सा मीठा, मैं इसमे खोना चाहता हुँ, बिस्कुट सा डूब कर इसमे मैं तेरा होना चाहता हुँ।

खामोशियों की जंज़ीरों को तोड़कर कुछ बात करलो, मैंने चाय बनाई है, अब तो एक मुलाकात करलो।

खामोशियों की जंज़ीरों को तोड़कर कुछ बात करलो, मैंने चाय बनाई है, अब तो एक मुलाकात करलो।

एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास, वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।

एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास, वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है।

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