आओ झुककर सलाम करे उनको, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है। खुशनसीब होते हैं वो लोग, जिनका लहू इस देश के काम आता है।

आओ झुककर सलाम करे उनको, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है। खुशनसीब होते हैं वो लोग, जिनका लहू इस देश के काम आता है।

कर जस्बे को बुलंद जवान, तेरे पीछे खड़ी आवाम, हर पत्ते को मार गिरायेंगे जो हमसे देश बटवायेंगे।

कर जस्बे को बुलंद जवान, तेरे पीछे खड़ी आवाम, हर पत्ते को मार गिरायेंगे जो हमसे देश बटवायेंगे।

सीनें में ज़ुनू, ऑखों में देंशभक्ति, की चमक रखता हुँ, दुश्मन के साँसें थम जाए, आवाज में वो धमक रखता हुँ।

सीनें में ज़ुनू, ऑखों में देंशभक्ति, की चमक रखता हुँ, दुश्मन के साँसें थम जाए, आवाज में वो धमक रखता हुँ।

कभी सनम को छोड़ के देख लेना, कभी शहीदों को याद करके देख लेना, कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो, देश से कभी इश्क करके देख लेना।

कभी सनम को छोड़ के देख लेना, कभी शहीदों को याद करके देख लेना, कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो, देश से कभी इश्क करके देख लेना।

दिवाली में बसे अली, रमजान में बसे राम, ऐसा सुंदर होना चाहिए अपना हिन्दुस्तान।

दिवाली में बसे अली, रमजान में बसे राम, ऐसा सुंदर होना चाहिए अपना हिन्दुस्तान।

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं, मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं, करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों, तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है।

खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं, मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं, करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों, तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है।

आओ झुकर सलाम करे उनको जिनके हिस्से मे ये मुकाम आता है, खुसनसीब है वो खून जा देश के काम आता है।

आओ झुकर सलाम करे उनको जिनके हिस्से मे ये मुकाम आता है, खुसनसीब है वो खून जा देश के काम आता है।

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है, उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी।

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है, उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी।

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिन्दुस्तान की शान का हैं।

कुछ नशा तिरंगे की आन का हैं, कुछ नशा मातृभूमि की शान का हैं, हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा, नशा ये हिन्दुस्तान की शान का हैं।

कोई नाम-व-निशां पूछे तो उस से कह देना, वतन हिन्दोस्तां अपना है हम हिन्दुस्तानी हैं।

कोई नाम-व-निशां पूछे तो उस से कह देना, वतन हिन्दोस्तां अपना है हम हिन्दुस्तानी हैं।

मर मिटे इस मिट्टी के लिये, जो स्वर्ग से भी प्यारी हैं, बाहें खोल ए मातृभूमि, ‘दुनिया में सबसे प्यारी हैं।

मर मिटे इस मिट्टी के लिये, जो स्वर्ग से भी प्यारी हैं, बाहें खोल ए मातृभूमि, ‘दुनिया में सबसे प्यारी हैं।

ज़िंदाँ में शहीदों का वो सरदार आया शैदा-ए-वतन पैकर-ए-ईसार आया है, दार-ओ-रसन की सरफ़राज़ी का दिन सरदार भगत-सिंह सरदार आया।

ज़िंदाँ में शहीदों का वो सरदार आया शैदा-ए-वतन पैकर-ए-ईसार आया है, दार-ओ-रसन की सरफ़राज़ी का दिन सरदार भगत-सिंह सरदार आया।

ख़ूँ शहीदान-ए-वतन का रंग ला कर ही रहा, आज ये जन्नत-निशाँ हिन्दोस्ताँ आज़ाद है।

ख़ूँ शहीदान-ए-वतन का रंग ला कर ही रहा, आज ये जन्नत-निशाँ हिन्दोस्ताँ आज़ाद है।

तिरंगे ने मायूस होकर सरकार से पूछा कि ये क्या हो रहा हैं, मेरा लहराने में कम और कफन में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हैं।

तिरंगे ने मायूस होकर सरकार से पूछा कि ये क्या हो रहा हैं, मेरा लहराने में कम और कफन में ज्यादा इस्तेमाल हो रहा हैं।

ऐ वतन जब भी सर-ए-दश्त कोई फूल खिला, देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया।

ऐ वतन जब भी सर-ए-दश्त कोई फूल खिला, देख कर तेरे शहीदों की निशानी रोया।

अनेकता में एकता ही इस देश की शान है, इसीलिए मेरा भारत महान है।

अनेकता में एकता ही इस देश की शान है, इसीलिए मेरा भारत महान है।

रौशनी बाँटता हूँ सरहदों के पार भी मैं, हम-वतन इस लिए ग़द्दार समझते हैं मुझे।

रौशनी बाँटता हूँ सरहदों के पार भी मैं, हम-वतन इस लिए ग़द्दार समझते हैं मुझे।

खूब बहती है गंगा बहने दो मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो, लाल हरे में मत बांटो मुझको छत पर मेरे एक तिरंगा रहने दो।

खूब बहती है गंगा बहने दो मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो, लाल हरे में मत बांटो मुझको छत पर मेरे एक तिरंगा रहने दो।

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा, मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी, सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा, मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं।

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं।

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हम बुलबुले हैं उसकी यह गुलसिता हमारा, परबत वो सबसे ऊंचा हमसाया आसमां का वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा।

सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तान हमारा हम बुलबुले हैं उसकी यह गुलसिता हमारा, परबत वो सबसे ऊंचा हमसाया आसमां का वो संतरी हमारा वो पासबाँ हमारा।

शहीदों की ज़मीं है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं, ये बंजर हो के भी बुज़दिल कभी पैदा नहीं करती।

शहीदों की ज़मीं है जिसको हिंदुस्तान कहते हैं, ये बंजर हो के भी बुज़दिल कभी पैदा नहीं करती।

देश के लिए प्यार है तो जताया करो किसी का इन्तजार मत करो, गर्व से बोलो जय हिन्द अभिमान से कहो भारतीय है हम।

देश के लिए प्यार है तो जताया करो किसी का इन्तजार मत करो, गर्व से बोलो जय हिन्द अभिमान से कहो भारतीय है हम।

चिराग जलते है तो जलने दो आसमां रोशन होता है होने दो, बंद करो हिन्दू मुस्लिम को बाटने का धंधा, अब हमे मिलजुलकर एक तिरंगे के नीचे रहने दो।

चिराग जलते है तो जलने दो आसमां रोशन होता है होने दो, बंद करो हिन्दू मुस्लिम को बाटने का धंधा, अब हमे मिलजुलकर एक तिरंगे के नीचे रहने दो।

मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है, देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।

मिटा दिया है वजूद उनका जो भी इनसे भिड़ा है, देश की रक्षा का संकल्प लिए जो जवान सरहद पर खड़ा है।

चलो फिर से खुद को जगाते हैं, अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं, सुनहरा रंग हैं गणतंत्र का, शहीदों के लहूँ से, ऐसे शहीदों को हम सर झुकाते हैं।

चलो फिर से खुद को जगाते हैं, अनुशासन का डंडा फिर घुमाते हैं, सुनहरा रंग हैं गणतंत्र का, शहीदों के लहूँ से, ऐसे शहीदों को हम सर झुकाते हैं।

फ़िदा-ए-मुल्क होना हासिल-ए-क़िस्मत समझते हैं, वतन पर जान देने ही को हम जन्नत समझते हैं।

फ़िदा-ए-मुल्क होना हासिल-ए-क़िस्मत समझते हैं, वतन पर जान देने ही को हम जन्नत समझते हैं।

ना सरकार मेरी है ना रौब मेरा है, ना बड़ा सा नाम मेरा है, मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है, मै हिन्दुस्तान का हूँ और हिन्दुस्तान मेरा है।

ना सरकार मेरी है ना रौब मेरा है, ना बड़ा सा नाम मेरा है, मुझे तो एक छोटी सी बात का गौरव है, मै हिन्दुस्तान का हूँ और हिन्दुस्तान मेरा है।

बर्फ के पहाड़ों पर आग सा जलता है, रेत के रेगिस्तान में वो हिम सा ठहरता है, एक फौजी ही तो है जनाब जो देश पे मर कर भी जिंदगी जी जाता हैं।

बर्फ के पहाड़ों पर आग सा जलता है, रेत के रेगिस्तान में वो हिम सा ठहरता है, एक फौजी ही तो है जनाब जो देश पे मर कर भी जिंदगी जी जाता हैं।

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा, हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा, मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं, हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताँ हमारा, हम बुलबुलें हैं इस की ये गुलसिताँ हमारा, मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना हिन्दी हैं, हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

मेरा कत्ल कर दोकोई शिकवा ना होगा, मुझे धोखा दे दो कोई बदला न होगा, पर जो आँख उठी मेरे वतन ए हिन्दुस्तान पे, तो फिर तलवार उठेगी और फिर कोई समझौता न होगा।

मेरा कत्ल कर दोकोई शिकवा ना होगा, मुझे धोखा दे दो कोई बदला न होगा, पर जो आँख उठी मेरे वतन ए हिन्दुस्तान पे, तो फिर तलवार उठेगी और फिर कोई समझौता न होगा।

दिलदारों सा दिल रख कर वहाँ भी अपनी यारी निभा लेते है, हँसी ठिठोली की खूब बातें कर मन के जज़्बात को आसानी से छुपा देते है।

दिलदारों सा दिल रख कर वहाँ भी अपनी यारी निभा लेते है, हँसी ठिठोली की खूब बातें कर मन के जज़्बात को आसानी से छुपा देते है।

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिन्दी हैं हम वतन है हिन्दोस्ताँ हमारा।

ऐ वतन इस क़दर उदास न हो, इस क़दर ग़र्क़-ए-रंज-व-यास न हो, फूट की आग हम बुझा देंगे, क़त्ल-व-ग़ारत-गरी मिटा देंगे।

ऐ वतन इस क़दर उदास न हो, इस क़दर ग़र्क़-ए-रंज-व-यास न हो, फूट की आग हम बुझा देंगे, क़त्ल-व-ग़ारत-गरी मिटा देंगे।

खूब बहती हैं अमन की गंगा बहने दो, मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो। लाल हरे रंग में ना बाटो हमको, मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो।

खूब बहती हैं अमन की गंगा बहने दो, मत फैलाओ देश में दंगा रहने दो। लाल हरे रंग में ना बाटो हमको, मेरे छत पर एक तिरंगा रहने दो।

जिन्हें है प्यार वतन से, वो देश के लिए अपना लहू बहाते हैं, माँ की चरणों में अपना शीश चढ़ाकर, देश की आजादी बचाते हैं, देश के लिए हँसते-हँसते अपनी जान लुटाते हैं।

जिन्हें है प्यार वतन से, वो देश के लिए अपना लहू बहाते हैं, माँ की चरणों में अपना शीश चढ़ाकर, देश की आजादी बचाते हैं, देश के लिए हँसते-हँसते अपनी जान लुटाते हैं।

ना जन्नत मैंने देखी है, ना जन्नत की तवक्क़ो है, मगर मैं ख़्वाब में, इस मुल्क का नक़शा बनाता हूँ।

ना जन्नत मैंने देखी है, ना जन्नत की तवक्क़ो है, मगर मैं ख़्वाब में, इस मुल्क का नक़शा बनाता हूँ।

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगें, आजाद हैं और आजाद ही रहेंगें।

दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगें, आजाद हैं और आजाद ही रहेंगें।

वतन परस्त शहीदों की ख़ाक लायेंगे, हम अपनी आंख का सुर्मा उसे बनायेंगे।

वतन परस्त शहीदों की ख़ाक लायेंगे, हम अपनी आंख का सुर्मा उसे बनायेंगे।

करता हूँ भारत माता से गुजारिश कि तेरी भक्ति के सिवा कोई बंदगी न मिले, हर जनम मिले हिन्दुस्तान की पावन धरा पर या फिर कभी जिंदगी न मिले।

करता हूँ भारत माता से गुजारिश कि तेरी भक्ति के सिवा कोई बंदगी न मिले, हर जनम मिले हिन्दुस्तान की पावन धरा पर या फिर कभी जिंदगी न मिले।

जो देश के लिए शहीद हुए उनको मेरा सलाम है, अपने खूं से जिस जमीं को सींचा उन बहादुरों को सलाम है।

जो देश के लिए शहीद हुए उनको मेरा सलाम है, अपने खूं से जिस जमीं को सींचा उन बहादुरों को सलाम है।

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त, मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।

दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़त, मेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी।

आन देश की शान देश की, देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी ये पहचान हैं।

आन देश की शान देश की, देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी ये पहचान हैं।

कर चले हम फ़िदा जान-व-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।

कर चले हम फ़िदा जान-व-तन साथियों, अब तुम्हारे हवाले वतन साथियों।

वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है, तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में।

वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है, तिरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में।

बहुत अज़ीज़ है अपने वतन की ख़ाक हमें, जो ख़्वाब आँखों में आया वो मोतबर आया।

बहुत अज़ीज़ है अपने वतन की ख़ाक हमें, जो ख़्वाब आँखों में आया वो मोतबर आया।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं, देखना हैं जोर कितन बाजू-ए-कातिल में हैं, वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में हैं।

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैं, देखना हैं जोर कितन बाजू-ए-कातिल में हैं, वक्त आने दे बता देंगे तुझे ए आसमां, हम अभी से क्या बताएं क्या हमारे दिल में हैं।

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं।

दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं।

शाम-ए-वतन कुछ अपने शहीदों का ज़िक्र कर, जिन के लहू से सुब्ह का चेहरा निखर गया।

शाम-ए-वतन कुछ अपने शहीदों का ज़िक्र कर, जिन के लहू से सुब्ह का चेहरा निखर गया।

हिंद की उल्फ़त का जज़्बा मेरे जिस्म-व-जां में है, वो मेरा मतलूब है मैं उसके तलबगारों में हूँ।

हिंद की उल्फ़त का जज़्बा मेरे जिस्म-व-जां में है, वो मेरा मतलूब है मैं उसके तलबगारों में हूँ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here