Tanha Shayari ॥ तन्हाई शायरी

ऐसा भी क्या गुनाह किया, चाहा जो तुम्हें फ़ना होके, इसलिए तुमने अकेला छोड़ दिया।

ऐसा भी क्या गुनाह किया, चाहा जो तुम्हें फ़ना होके, इसलिए तुमने अकेला छोड़ दिया।

भटका मैं इस दुनिया में इक साथ की तलाश में, मैं गया जिस भी शहर, मैंने खुद को अकेला पाया।

भटका मैं इस दुनिया में इक साथ की तलाश में, मैं गया जिस भी शहर, मैंने खुद को अकेला पाया।

जानता पहले से था मैं, लेकिन एहसास अब हो रहा है, अकेला तो बहुत समय से हूं मैं, पर महसूस अब हो रहा है।

जानता पहले से था मैं, लेकिन एहसास अब हो रहा है, अकेला तो बहुत समय से हूं मैं, पर महसूस अब हो रहा है।

किसी ने दिल जीत लिया, किसी ने दिल हारा था, जो अकेला रह गया, बस वो दिल हमारा था।

किसी ने दिल जीत लिया, किसी ने दिल हारा था, जो अकेला रह गया, बस वो दिल हमारा था।

गुजर जाती है ज़िन्दगी, यूँ ही गुजर रहे हैं पल, कोई हमसफ़र मिले न मिले, तू अकेला ही चल।

गुजर जाती है ज़िन्दगी, यूँ ही गुजर रहे हैं पल, कोई हमसफ़र मिले न मिले, तू अकेला ही चल।

मैं जो हूँ मुझे रहने दे हवा के जैसे बहने दे, तन्हा सा मुसाफिर हूँ मुझे तन्हा ही तू रहने दे।

मैं जो हूँ मुझे रहने दे हवा के जैसे बहने दे, तन्हा सा मुसाफिर हूँ मुझे तन्हा ही तू रहने दे।

जहां महफ़िल सजी हो वह मेला होता है, जिसका दिल टूटा हो, वो तन्हा,अकेला होता है।

जहां महफ़िल सजी हो वह मेला होता है, जिसका दिल टूटा हो, वो तन्हा,अकेला होता है।

तन्हाई में चलते चलते अब पैर लडखडा रहे हैं, कभी साथ चलता था कोई, अब अकेले चलें जा रहे हैं।

तन्हाई में चलते चलते अब पैर लडखडा रहे हैं, कभी साथ चलता था कोई, अब अकेले चलें जा रहे हैं।

तू उदास मत हुआ कर इन हजारों के बीच, आख़िर चांद भी अकेला रहता हैं सितारों के बीच।

तू उदास मत हुआ कर इन हजारों के बीच, आख़िर चांद भी अकेला रहता हैं सितारों के बीच।

अकेला हूँ या नहीं इसमें मुझे शंका है, तुम ही बता दो ना भ्रम मेरे मन का है।

अकेला हूँ या नहीं इसमें मुझे शंका है, तुम ही बता दो ना भ्रम मेरे मन का है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.