आखिर गिरते हुए आँसू ने पूछ ही लिया, मुझसे गिरा दिया न, मुझे उसके लिए? जिसके लिए तू कुछ भी नही।

आखिर गिरते हुए आँसू ने पूछ ही लिया, मुझसे गिरा दिया न, मुझे उसके लिए? जिसके लिए तू कुछ भी नही।

मुझे न जाने उस पर इतना यकीन क्यों है, उसका ख्याल भी इतना हसीन क्यों है, सुना है प्यार का दर्द मीठा होता है, तो आँख से निकला आँसू नमकीन क्यों है।

मुझे न जाने उस पर इतना यकीन क्यों है, उसका ख्याल भी इतना हसीन क्यों है, सुना है प्यार का दर्द मीठा होता है, तो आँख से निकला आँसू नमकीन क्यों है।

कुछ तो बात होगी तुझमे, जो कभी नहीं रोया उसे रुलाया है तुमने।

कुछ तो बात होगी तुझमे, जो कभी नहीं रोया उसे रुलाया है तुमने।

आती नही वो पर निसानी भेज देती हैं, दास्तां पुरानी ख्वाबो में भेज देती हैं, उनके यादो के मंजर कितने मिठे है, आखो में कभी-कभी पानी भेज देती हैं।

आती नही वो पर निसानी भेज देती हैं, दास्तां पुरानी ख्वाबो में भेज देती हैं, उनके यादो के मंजर कितने मिठे है, आखो में कभी-कभी पानी भेज देती हैं।

इस जहाँ में किसी से कभी प्यार मत करना, अपने कीमती आँसू इस तरह बर्बाद मत करना, कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं, फूलों पर कभी तुम ऐतबार मत करना।

इस जहाँ में किसी से कभी प्यार मत करना, अपने कीमती आँसू इस तरह बर्बाद मत करना, कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं, फूलों पर कभी तुम ऐतबार मत करना।

आया नहीं था कभी मेरी आँख से एक अश्क भी मोहब्बत क्या हुई अश्कों का सैलाब आ गया।

आया नहीं था कभी मेरी आँख से एक अश्क भी मोहब्बत क्या हुई अश्कों का सैलाब आ गया।

जिनकी किस्मत में लिखा हो रोना, वह मुस्कुरा भी दे तो आंसू निकल आते हैं।

जिनकी किस्मत में लिखा हो रोना, वह मुस्कुरा भी दे तो आंसू निकल आते हैं।

मेरे हिस्से की ज़मीन बंजर थी, मैं वाकिफ ना था, इलज़ाम मैं देता रहा बरसात को।

मेरे हिस्से की ज़मीन बंजर थी, मैं वाकिफ ना था, इलज़ाम मैं देता रहा बरसात को।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

टपक पड़ते हैं आँसू जब तुम्हारी याद आती है, ये वो बरसात है जिसका कोई मौसम नहीं होता।

जैसे दुनिया में अकेलेपन के ताने मिलते हैं, काश तुम भी हमें वैसे ही मिल जाते।

जैसे दुनिया में अकेलेपन के ताने मिलते हैं, काश तुम भी हमें वैसे ही मिल जाते।

मुस्कुराने की आरजू में छुपाया जो दर्द को, अश्क हमारी आंखों में पत्थर के हो गए।

मुस्कुराने की आरजू में छुपाया जो दर्द को, अश्क हमारी आंखों में पत्थर के हो गए।

जिन्हें सलीका है ग़म समझने का उन्हींके रोने में आँसू नज़र नहीं आते… ख़ुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना बुरे ज़माने कभी पूछकर नहीं आते…

जिन्हें सलीका है ग़म समझने का उन्हींके रोने में आँसू नज़र नहीं आते… ख़ुशी की आँख में आँसू की भी जगह रखना बुरे ज़माने कभी पूछकर नहीं आते…

खुद के लिए इक सज़ा मुकर्रर कर ली मैंने! तेरी खुशियो की खातिर तुझसे दूरियां चुन ली मैंने

खुद के लिए इक सज़ा मुकर्रर कर ली मैंने! तेरी खुशियो की खातिर तुझसे दूरियां चुन ली मैंने

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