किसी को अपना मानने में इक उम्र लग जाती है फिर उन्हें जानने में।

नकाब अच्छाई का रहता है छिपे हुए चेहरे में देर लग ही जाती है अक्सर झूठे लोगों को पहचानने में।

झूठी दुनिया के झूठे फ़साने हैं लोग भी झूठे और झूठे ज़माने हैं धोखे मिलते है हर कदम पर यहाँ हर तरफ भीड़ है लेकिन अफ़सोस सब बेगाने हैं।

कौन सुनता है चीखें मजबूर गरीब लाचारों की जिसके पास ताकत है दौलत की वहीं इंसाफ टिकता है।

ये मत समझ कि तेरे काबिल नहीं हैं हम तड़प रहे हैं वो अब भी जिसे हासिल नहीं हैं हम।

बातें विश्वास और भरोसे की बेमानी सी लगती हैं झूठी दुनिया में वफादारी अनजानी सी लगती है।

जरूर एक दिन वो शख्स तड़पेगा हमारे लिए अभी तो खुशियाँ बहोत मिल रही है उसे मतलबी लोगो से।

हम मरना भी उस अंदाज़ में पसंद करते है जिस अंदाज में लोग जीने के लिये तरसते है।

अच्छे दोस्त आँखों में खटकने लगते है जब मतलबी लोग दोस्त बनने लगते है।

जिस पर भरोसा होता है जब वहीं धोखा देता है तो पूरी दुनिया मतलबी लगने लगती है।



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