100+ Bhagawad Gita Quotes {Life Lessons} by Krishna in Hindi

The Bhagavad Gita, often referred to simply as the Gita, is a 700-verse Hindu scripture that is part of the Indian epic Mahabharata. It is a sacred text of great significance in Hinduism and is written in the form of a dialogue between Prince Arjuna and the god Krishna, who serves as his charioteer. The Gita is set on the battlefield just before the Kurukshetra War, where Arjuna is filled with moral dilemma and doubt about fighting in the war. In response, Krishna imparts profound spiritual wisdom and guidance, addressing fundamental concepts of life, duty, righteousness, and the path to spiritual enlightenment. The Gita explores various paths to attaining union with the divine, including devotion (bhakti), knowledge (jnana), and selfless action (karma). It is a timeless philosophical and spiritual masterpiece, offering insights into the human condition and the pursuit of inner peace and self-realization. The Bhagavad Gita’s teachings have transcended religious boundaries and continue to inspire people around the world seeking spiritual wisdom and guidance.

आप कितने भी अच्छे कर्म कर लो, लेकिन समाज आपके बुरे कार्यों को ही सदैव याद रखता है।इसलिए लोग क्या कहेंगे यह सोचने से बेहतर है कि आप अपना कर्म करें।

आप कितने भी अच्छे कर्म कर लोलेकिन समाज आपके बुरे कार्यों को ही सदैव याद रखता है।इसलिए लोग क्या कहेंगे यह सोचने से बेहतर है कि आप अपना कर्म करें।


जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उसी प्रकार निश्चित है, जितना कि मरने वाले के लिए जन्म लेना। इसलिए इस विषय पर शोक मनाना व्यर्थ है।

जन्म लेने वाले के लिए मृत्यु उसी प्रकार निश्चित हैजितना कि मरने वाले के लिए जन्म लेना। इसलिए इस विषय पर शोक मनाना व्यर्थ है।


गीता में कहा गया है जो इंसान किसी की कमी को पूरी करता है वो सही अर्थों में महान होता है..!

गीता में कहा गया है जो इंसान किसी की कमी को पूरी करता है वो सही अर्थों में महान होता है..!


तुम्हारे साथ जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वो भी अच्छा है और जो होगा वो भी अच्छा होगा।

तुम्हारे साथ जो हुआ वह अच्छा हुआजो हो रहा है वो भी अच्छा है और जो होगा वो भी अच्छा होगा।


गीता के अनुसार जिंदगी में हम कितने सही हैं और कितने गलत हैं यह केवल दो लोग जानते हैं एक परमात्मा और दूसरी हमारी अंतरात्मा..!

गीता के अनुसार जिंदगी में हम कितने सही हैं और कितने गलत हैं यह केवल दो लोग जानते हैं एक परमात्मा और दूसरी हमारी अंतरात्मा..!


जीवन का आनंद ना तो भूतकाल में है और ना भविष्यकाल में। बल्कि जीवन तो बस वर्तमान को जीने में है।

जीवन का आनंद ना तो भूतकाल में है और ना भविष्यकाल में। बल्कि जीवन तो बस वर्तमान को जीने में है।


जब तक शरीर है तब तक कमजोरियां तो रहेगी ही इसलिए कमजोरियों की चिंता छोड़ो और जो सही कर्म है उस पर अपना ध्यान लगाओ..!

जब तक शरीर है तब तक कमजोरियां तो रहेगी ही इसलिए कमजोरियों की चिंता छोड़ो और जो सही कर्म है उस पर अपना ध्यान लगाओ..!


अर्जुन तुम भला क्यों रोते हो? तुमने जो खोया, क्या वह तुमने पैदा किया था। आज जो तुम्हारा है वह कल किसी और का होगा। क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।

अर्जुन तुम भला क्यों रोते होतुमने जो खोयाक्या वह तुमने पैदा किया था। आज जो तुम्हारा है वह कल किसी और का होगा। क्योंकि परिवर्तन ही संसार का नियम है।


किसी का अच्छा ना कर सको तो बुरा भी मत करना क्योंकि दुनिया कमजोर है लेकिन दुनिया बनाने वाला नहीं..!

किसी का अच्छा ना कर सको तो बुरा भी मत करना क्योंकि दुनिया कमजोर है लेकिन दुनिया बनाने वाला नहीं..!


यदि कोई व्यक्ति विश्वास के साथ इच्छित वस्तु को लेकर नित्य चिंतन करता है, तो वह जो चाहे वह बन सकता है।

यदि कोई व्यक्ति विश्वास के साथ इच्छित वस्तु को लेकर नित्य चिंतन करता हैतो वह जो चाहे वह बन सकता है।


सच्चा धर्म यह है कि जिन बातों को इंसान अपने लिए अच्छा नहीं समझता उन्हें दूसरों के लिए भी प्रयोग ना करें..!

सच्चा धर्म यह है कि जिन बातों को इंसान अपने लिए अच्छा नहीं समझता उन्हें दूसरों के लिए भी प्रयोग ना करें..!


कोई भी व्यक्ति अपने विश्वास से बनता है। वह जैसा विश्वास करता है, उसी अनुरूप बन जाता है।

कोई भी व्यक्ति अपने विश्वास से बनता है। वह जैसा विश्वास करता हैउसी अनुरूप बन जाता है।


मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन हैलेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।


मेरे लिए समस्त प्राणी समान हैं। ना तो कोई मुझे अत्यधिक प्रिय है और ना ही कम। लेकिन जो मेरी भक्ति पूरे मन से करते हैं, मैं सदैव आवश्यकता पड़ने पर उनके काम आता हूं।

मेरे लिए समस्त प्राणी समान हैं। ना तो कोई मुझे अत्यधिक प्रिय है और ना ही कम। लेकिन जो मेरी भक्ति पूरे मन से करते हैंमैं सदैव आवश्यकता पड़ने पर उनके काम आता हूं।


मन की शांति से बढ़कर इस संसार में कोई भी संपत्ति नहीं है।

मन की शांति से बढ़कर इस संसार में कोई भी संपत्ति नहीं है।


जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता है, वह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।

जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता हैवह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।


कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।

कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।


अपना, पराया, छोटा, बड़ा, इत्यादि को भूलकर यह जानो कि यह सब तुम्हारा है और तुम प्रति एक के हो।

अपनापरायाछोटाबड़ाइत्यादि को भूलकर यह जानो कि यह सब तुम्हारा है और तुम प्रति एक के हो।


बिना फल की कामनाएं ही सच्चा कर्म है ईश्वर चरण में हो समर्पण वही केवल धर्म है।

बिना फल की कामनाएं ही सच्चा कर्म है ईश्वर चरण में हो समर्पण वही केवल धर्म है।


जो व्यक्ति क्रोध करता है, उसके मन में भ्रम पैदा होता है, जिससे उसका बौद्धिक तर्क नष्ट हो जाता है। और तभी व्यक्ति का धीरे धीरे पतन होने लगता है।

जो व्यक्ति क्रोध करता हैउसके मन में भ्रम पैदा होता हैजिससे उसका बौद्धिक तर्क नष्ट हो जाता है। और तभी व्यक्ति का धीरे धीरे पतन होने लगता है।


गीता में लिखा है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तब इंसान के बात करने का तरीका बदल जाता है।

गीता में लिखा है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तब इंसान के बात करने का तरीका बदल जाता है।


इस सम्पूर्ण संसार में अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक खराब होती है।

इस सम्पूर्ण संसार में अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक खराब होती है।


सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।

सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।


जीवन में सफलता का ताला दो चाबियों से खुलता है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ़ संकल्प।

जीवन में सफलता का ताला दो चाबियों से खुलता है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ़ संकल्प।


जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।


कठिन परिश्रम से बचने के लिए व्यक्ति को भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

कठिन परिश्रम से बचने के लिए व्यक्ति को भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए।


गीता में कहा गया है कोई भी अपने कर्म से भाग नहीं सकता कर्म का फल तो भुगतना ही पड़ता है।

गीता में कहा गया है कोई भी अपने कर्म से भाग नहीं सकता कर्म का फल तो भुगतना ही पड़ता है।


मनुष्य को अपने कर्मों के अच्छे और बुरे फल के विषय में सदैव सोचकर चिंता ग्रस्त नहीं होना चाहिए।

मनुष्य को अपने कर्मों के अच्छे और बुरे फल के विषय में सदैव सोचकर चिंता ग्रस्त नहीं होना चाहिए।


मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वह बन जाता है।

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता हैजैसा वह विश्वास करता हैवैसा वह बन जाता है।


जो मनुष्य प्रतिदिन खाने, सोने और आमोद प्रमोद के कार्यों में लिप्त रहता है। वह नियमित तौर पर योगाभ्यास करके समस्त क्लेशों से छुटकारा पा सकता है।

जो मनुष्य प्रतिदिन खानेसोने और आमोद प्रमोद के कार्यों में लिप्त रहता है। वह नियमित तौर पर योगाभ्यास करके समस्त क्लेशों से छुटकारा पा सकता है।


जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।

जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।


श्रीमद भागवत गीता का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण करना है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सदैव मानव कल्याण की ओर अग्रसरित रहना चाहिए।

श्रीमद भागवत गीता का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण करना है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सदैव मानव कल्याण की ओर अग्रसरित रहना चाहिए।


माफ करना और शांत रहना सीखिए ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे।

माफ करना और शांत रहना सीखिए ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे।


व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।

व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।


जो होने वाला है वो होकर ही रहता है, और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।

जो होने वाला है वो होकर ही रहता हैऔर जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता हैउन्हें चिंता कभी नही सताती है।


किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।

किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।


इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है यह जानते हुए भी कि भाग्य से भी ऊंचा उसका कर्म है जिसके स्वयं के हाथों में है।

इंसान हमेशा अपने भाग्य को कोसता है यह जानते हुए भी कि भाग्य से भी ऊंचा उसका कर्म है जिसके स्वयं के हाथों में है।


व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।

व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।


मै उन्हे ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है ।

मै उन्हे ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है ।


सत्य कभी दावा नहीं करता कि मैं सत्य हूं लेकिन झूठ हमेशा दावा करता हैं कि सिर्फ मैं ही सत्य हूं।

सत्य कभी दावा नहीं करता कि मैं सत्य हूं लेकिन झूठ हमेशा दावा करता हैं कि सिर्फ मैं ही सत्य हूं।


परिवर्तन संसार का नियम है समय के साथ संसार मे हर चीज परिवर्तन के नियम का पालन करती है ।

परिवर्तन संसार का नियम है समय के साथ संसार मे हर चीज परिवर्तन के नियम का पालन करती है ।


हालांकि मैं भूत, भविष्य और वर्तमान काल के तीनों जीवों को जानता हूं लेकिन मुझे वास्तव में कोई नही जानता है।

हालांकि मैं भूतभविष्य और वर्तमान काल के तीनों जीवों को जानता हूं लेकिन मुझे वास्तव में कोई नही जानता है।


संयम , सदाचार , स्नेह एंव सेवा ये गुण सत्संग के बिना नही आते.

संयम , सदाचार , स्नेह एंव सेवा ये गुण सत्संग के बिना नही आते.


मनुष्य जिस रूप में ईश्वर को याद करता है, ईश्वर भी उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं।

मनुष्य जिस रूप में ईश्वर को याद करता हैईश्वर भी उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं।


अपने कर्तव्य का पालन करना ही प्रकृति द्वारा निर्धारित किया हुआ हो ,वह कोई पास नही है।

अपने कर्तव्य का पालन करना ही प्रकृति द्वारा निर्धारित किया हुआ हो ,वह कोई पास नही है।


सज्जन व्यक्तियों को सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इन्हीं के पद चिन्हों पर सामान्य व्यक्ति अपने रास्ते चुनता है।

सज्जन व्यक्तियों को सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इन्हीं के पद चिन्हों पर सामान्य व्यक्ति अपने रास्ते चुनता है।


बुद्धिमान को अपनी चेतना को एकजुट करना चाहिए और फल के लिए इच्छा छोड़ देनी चाहिए ।

बुद्धिमान को अपनी चेतना को एकजुट करना चाहिए और फल के लिए इच्छा छोड़ देनी चाहिए ।


मन अवश्य ही चंचल होता है लेकिन उसे अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से वश में लाया जा सकता है।

मन अवश्य ही चंचल होता है लेकिन उसे अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से वश में लाया जा सकता है।


इन्द्रियो की दुनिया मे कल्पना सुखो की प्रथम शुरुआत है और अन्त भी जो दुख को जन्म देता है ।

इन्द्रियो की दुनिया मे कल्पना सुखो की प्रथम शुरुआत है और अन्त भी जो दुख को जन्म देता है ।


इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते है

इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते है


सच्चा धर्म यह है कि जिन बातों को इंसान अपने लिए अच्छा नहीं समझता उन्हें दूसरों के लिए भी प्रयोग ना करें..!

सच्चा धर्म यह है कि जिन बातों को इंसान अपने लिए अच्छा नहीं समझता उन्हें दूसरों के लिए भी प्रयोग ना करें..!


कोई भी व्यक्ति अपने विश्वास से बनता है। वह जैसा विश्वास करता है, उसी अनुरूप बन जाता है।

कोई भी व्यक्ति अपने विश्वास से बनता है। वह जैसा विश्वास करता हैउसी अनुरूप बन जाता है।


मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन हैलेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।


मेरे लिए समस्त प्राणी समान हैं। ना तो कोई मुझे अत्यधिक प्रिय है और ना ही कम। लेकिन जो मेरी भक्ति पूरे मन से करते हैं, मैं सदैव आवश्यकता पड़ने पर उनके काम आता हूं।

मेरे लिए समस्त प्राणी समान हैं। ना तो कोई मुझे अत्यधिक प्रिय है और ना ही कम। लेकिन जो मेरी भक्ति पूरे मन से करते हैंमैं सदैव आवश्यकता पड़ने पर उनके काम आता हूं।


मन की शांति से बढ़कर इस संसार में कोई भी संपत्ति नहीं है।


जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता है, वह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।

जो मनुष्य फल की इच्छा का त्याग करके केवल कर्म पर ध्यान देता हैवह अवश्य ही जीवन में सफल होता है।


कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।

कोई भी इंसान जन्म से नहीं बल्कि अपने कर्मो से महान बनता है।


अपना, पराया, छोटा, बड़ा, इत्यादि को भूलकर यह जानो कि यह सब तुम्हारा है और तुम प्रति एक के हो।

अपनापरायाछोटाबड़ाइत्यादि को भूलकर यह जानो कि यह सब तुम्हारा है और तुम प्रति एक के हो।


बिना फल की कामनाएं ही सच्चा कर्म है ईश्वर चरण में हो समर्पण वही केवल धर्म है।

बिना फल की कामनाएं ही सच्चा कर्म है ईश्वर चरण में हो समर्पण वही केवल धर्म है।


जो व्यक्ति क्रोध करता है, उसके मन में भ्रम पैदा होता है, जिससे उसका बौद्धिक तर्क नष्ट हो जाता है। और तभी व्यक्ति का धीरे धीरे पतन होने लगता है।

जो व्यक्ति क्रोध करता हैउसके मन में भ्रम पैदा होता हैजिससे उसका बौद्धिक तर्क नष्ट हो जाता है। और तभी व्यक्ति का धीरे धीरे पतन होने लगता है।


गीता में लिखा है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तब इंसान के बात करने का तरीका बदल जाता है।

गीता में लिखा है जब इंसान की जरूरत बदल जाती है तब इंसान के बात करने का तरीका बदल जाता है।


इस सम्पूर्ण संसार में अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक खराब होती है।

इस सम्पूर्ण संसार में अपकीर्ति मृत्यु से भी अधिक खराब होती है।


सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।

सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और।


जीवन में सफलता का ताला दो चाबियों से खुलता है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ़ संकल्प।

जीवन में सफलता का ताला दो चाबियों से खुलता है। एक कठिन परिश्रम और दूसरा दृढ़ संकल्प।


जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है।


कठिन परिश्रम से बचने के लिए व्यक्ति को भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए।

कठिन परिश्रम से बचने के लिए व्यक्ति को भाग्य और ईश्वर की इच्छा जैसे बहानों के बजाय चुनौतियों का सामना करना चाहिए।


गीता में कहा गया है कोई भी अपने कर्म से भाग नहीं सकता कर्म का फल तो भुगतना ही पड़ता है।

गीता में कहा गया है कोई भी अपने कर्म से भाग नहीं सकता कर्म का फल तो भुगतना ही पड़ता है।


मनुष्य को अपने कर्मों के अच्छे और बुरे फल के विषय में सदैव सोचकर चिंता ग्रस्त नहीं होना चाहिए।

मनुष्य को अपने कर्मों के अच्छे और बुरे फल के विषय में सदैव सोचकर चिंता ग्रस्त नहीं होना चाहिए।


मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है, जैसा वह विश्वास करता है, वैसा वह बन जाता है।

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता हैजैसा वह विश्वास करता हैवैसा वह बन जाता है।


जो मनुष्य प्रतिदिन खाने, सोने और आमोद प्रमोद के कार्यों में लिप्त रहता है। वह नियमित तौर पर योगाभ्यास करके समस्त क्लेशों से छुटकारा पा सकता है।

जो मनुष्य प्रतिदिन खानेसोने और आमोद प्रमोद के कार्यों में लिप्त रहता है। वह नियमित तौर पर योगाभ्यास करके समस्त क्लेशों से छुटकारा पा सकता है।


जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।

जब इंसान अपने काम में आनंद खोज लेते हैं तब वे पूर्णता प्राप्त करते है।


श्रीमद भागवत गीता का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण करना है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सदैव मानव कल्याण की ओर अग्रसरित रहना चाहिए।

श्रीमद भागवत गीता का मुख्य उद्देश्य मानव कल्याण करना है। इसलिए प्रत्येक मनुष्य को सदैव मानव कल्याण की ओर अग्रसरित रहना चाहिए।


जब भ्रमित अर्जुन कुरुक्षेत्र में सलाह के लिए अपने सारथी भगवान कृष्ण के पास गए , तो भगवान कृष्ण ने कुछ तर्कसंगत दार्शनिक अवधारणाएं बताईं जो आज भी प्रासंगिक हैं।

जब भ्रमित अर्जुन कुरुक्षेत्र में सलाह के लिए अपने सारथी भगवान कृष्ण के पास गए , तो भगवान कृष्ण ने कुछ तर्कसंगत दार्शनिक अवधारणाएं बताईं जो आज भी प्रासंगिक हैं।


भगवद गीता एक महाकाव्य ग्रंथ है जिसमें हमारी सभी समस्याओं का उत्तर है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई नेताओं के लिए प्रेरणा की पुस्तक थी। इन कुछ भगवद गीता संदेशों पर एक नज़र डालें जिनका उपयोग आप अपने जीवन को सही रास्ते पर वापस लाने के लिए कर सकते हैं।भगवद गीता एक महाकाव्य ग्रंथ है जिसमें हमारी सभी समस्याओं का उत्तर है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कई नेताओं के लिए प्रेरणा की पुस्तक थी। इन कुछ भगवद

गीता संदेशों पर एक नज़र डालें जिनका उपयोग आप अपने जीवन को सही रास्ते पर वापस लाने के लिए कर सकते हैं।


माफ करना और शांत रहना सीखिए ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे।

माफ करना और शांत रहना सीखिए ऐसी ताकत बन जाओगे कि पहाड़ भी रास्ता देंगे।


व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।

व्यक्ति को अपनी इन्द्रियों को वश में रखने के लिए बुद्धि और मन को नियंत्रित रखना होगा।


जो होने वाला है वो होकर ही रहता है, और जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता है, उन्हें चिंता कभी नही सताती है।

जो होने वाला है वो होकर ही रहता हैऔर जो नहीं होने वाला वह कभी नहीं होता,ऐसा निश्चय जिनकी बुद्धि में होता हैउन्हें चिंता कभी नही सताती है।


किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।

किसी भी व्यक्ति को ना तो समय से पहले और ना ही भाग्य से अधिक कुछ मिलता है। लेकिन उसे सदैव पाने के लिए प्रयत्नशील रहना चाहिए।


व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।

व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।


व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।

व्यक्ति को आत्म ज्ञान के माध्यम से संदेह रूपी अज्ञानता को समाप्त करना चाहिए।


मै उन्हे ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है ।

मै उन्हे ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते है और जो मुझसे प्रेम करते है ।


सत्य कभी दावा नहीं करता कि मैं सत्य हूं लेकिन झूठ हमेशा दावा करता हैं कि सिर्फ मैं ही सत्य हूं।

सत्य कभी दावा नहीं करता कि मैं सत्य हूं लेकिन झूठ हमेशा दावा करता हैं कि सिर्फ मैं ही सत्य हूं।


परिवर्तन संसार का नियम है समय के साथ संसार मे हर चीज परिवर्तन के नियम का पालन करती है ।

परिवर्तन संसार का नियम है समय के साथ संसार मे हर चीज परिवर्तन के नियम का पालन करती है ।


हालांकि मैं भूत, भविष्य और वर्तमान काल के तीनों जीवों को जानता हूं लेकिन मुझे वास्तव में कोई नही जानता है।

हालांकि मैं भूतभविष्य और वर्तमान काल के तीनों जीवों को जानता हूं लेकिन मुझे वास्तव में कोई नही जानता है।


संयम , सदाचार , स्नेह एंव सेवा ये गुण सत्संग के बिना नही आते.

संयम , सदाचार , स्नेह एंव सेवा ये गुण सत्संग के बिना नही आते.


मनुष्य जिस रूप में ईश्वर को याद करता है, ईश्वर भी उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं।

मनुष्य जिस रूप में ईश्वर को याद करता हैईश्वर भी उसे उसी रूप में दर्शन देते हैं।


अपने कर्तव्य का पालन करना ही प्रकृति द्वारा निर्धारित किया हुआ हो ,वह कोई पास नही है।

अपने कर्तव्य का पालन करना ही प्रकृति द्वारा निर्धारित किया हुआ हो ,वह कोई पास नही है।


सज्जन व्यक्तियों को सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इन्हीं के पद चिन्हों पर सामान्य व्यक्ति अपने रास्ते चुनता है।

सज्जन व्यक्तियों को सदैव अच्छा व्यवहार करना चाहिए। क्योंकि इन्हीं के पद चिन्हों पर सामान्य व्यक्ति अपने रास्ते चुनता है।


बुद्धिमान को अपनी चेतना को एकजुट करना चाहिए और फल के लिए इच्छा छोड़ देनी चाहिए ।

बुद्धिमान को अपनी चेतना को एकजुट करना चाहिए और फल के लिए इच्छा छोड़ देनी चाहिए ।


मन अवश्य ही चंचल होता है लेकिन उसे अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से वश में लाया जा सकता है।

मन अवश्य ही चंचल होता है लेकिन उसे अभ्यास और वैराग्य के माध्यम से वश में लाया जा सकता है।


इन्द्रियो की दुनिया मे कल्पना सुखो की प्रथम शुरुआत है और अन्त भी जो दुख को जन्म देता है ।

इन्द्रियो की दुनिया मे कल्पना सुखो की प्रथम शुरुआत है और अन्त भी जो दुख को जन्म देता है ।


इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं।

इस सम्पूर्ण संसार में कोई भी व्यक्ति महान नही जन्मा होता है। बल्कि उसके कर्म उसे महान बनाते हैं।


जीवन मे कभी गुस्सा या क्रोध ना करे यह आपके जीवन के ध्वंस कर देगा ।

जीवन मे कभी गुस्सा या क्रोध ना करे यह आपके जीवन के ध्वंस कर देगा ।


हे पार्थ! मैंने और तुमने अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए धरती पर कई अवतार लिए हैं। लेकिन मुझे याद है और तुम्हें नहीं।

हे पार्थमैंने और तुमने अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए धरती पर कई अवतार लिए हैं। लेकिन मुझे याद है और तुम्हें नहीं।


वासना , क्रोध और लालच नरक के तीन दरवाजे है ।

वासना , क्रोध और लालच नरक के तीन दरवाजे है ।


जो मनुष्य जिस देवता की विश्वास के साथ भक्ति करता है। मैं उस व्यक्ति की उसी देवता में दृढ़ता बढ़ा देता हूं।

जो मनुष्य जिस देवता की विश्वास के साथ भक्ति करता है। मैं उस व्यक्ति की उसी देवता में दृढ़ता बढ़ा देता हूं।


सभी काम छोड़कर बस भगवान मे पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ ,मै तुम्हे सभी पापो से मुक्त कर दूंगा ।

सभी काम छोड़कर बस भगवान मे पूर्ण रूप से समर्पित हो जाओ ,मै तुम्हे सभी पापो से मुक्त कर दूंगा ।


ऐसा कुछ भी नही ,चेतन या अचेतन ,जो मेरे बिना अस्तित्व मे रह सकता हो ।

ऐसा कुछ भी नही ,चेतन या अचेतन ,जो मेरे बिना अस्तित्व मे रह सकता हो ।


परिवर्तन ही इस सम्पूर्ण संसार का नियम है। इसलिए व्यक्ति को कभी अपने वर्तमान पर घमंड नहीं करना चाहिए।

परिवर्तन ही इस सम्पूर्ण संसार का नियम है। इसलिए व्यक्ति को कभी अपने वर्तमान पर घमंड नहीं करना चाहिए।


जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है।

जिसने जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है और मृत्यु के पश्चात् पुनर्जन्म भी निश्चित है।


मनुष्य का सम्पूर्ण शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है, अग्नि, जल, वायु, आकाश और पृथ्वी। और अंत में उसके शरीर को इन्हीं पंचतत्वों में ही विलीन हो जाना है।

मनुष्य का सम्पूर्ण शरीर पांच तत्वों से मिलकर बना हैअग्निजलवायुआकाश और पृथ्वी। और अंत में उसके शरीर को इन्हीं पंचतत्वों में ही विलीन हो जाना है।


व्यक्ति को अपने आप को सदैव ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए। तभी वह दुखों, चिंता और परेशानियों से मुक्त रह सकता है।

व्यक्ति को अपने आप को सदैव ईश्वर को समर्पित कर देना चाहिए। तभी वह दुखोंचिंता और परेशानियों से मुक्त रह सकता है।


प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को क्रोध और लोभ त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे आत्मा का पतन होता है।

प्रत्येक बुद्धिमान व्यक्ति को क्रोध और लोभ त्याग देना चाहिए क्योंकि इससे आत्मा का पतन होता है।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *