मेरे हिस्से की खुशियां कब आएगी, कब हम भी अपने हिस्से का मुस्कुरायेंगे।

मेरे हिस्से की खुशियां कब आएगी, कब हम भी अपने हिस्से का मुस्कुरायेंगे।

जितना मुश्किल किसी को पाना होता हैं न, उससे कई ज्यादा मुश्किल उसे भुलाना होता हैं।

जितना मुश्किल किसी को पाना होता हैं न, उससे कई ज्यादा मुश्किल उसे भुलाना होता हैं।

तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून दिल को, मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है।

तुझे याद कर लूं तो मिल जाता है सुकून दिल को, मेरे गमों का इलाज भी कितना सस्ता है।

किताबें, लोग और आंखें, बड़ी खूबी से पढ़ना सीख गए हम।

किताबें, लोग और आंखें, बड़ी खूबी से पढ़ना सीख गए हम।

कुछ नही सूझता जब किरदार छोटा हो, किमत उसकी भी होती है जो सिका खोटा हो।

कुछ नही सूझता जब किरदार छोटा हो, किमत उसकी भी होती है जो सिका खोटा हो।

अल्फाज तेरे आज भी गूंजते हैं मेरे जहन में, आ के देख जरा वहीं हैं हम तेरे इंतजार में।

अल्फाज तेरे आज भी गूंजते हैं मेरे जहन में, आ के देख जरा वहीं हैं हम तेरे इंतजार में।

चैन तो खैर इस जनम में आने से रहा, और अब मौत भी तरसती है आने के लिए।

चैन तो खैर इस जनम में आने से रहा, और अब मौत भी तरसती है आने के लिए।

किस्मत का भी खेल बहुत अजीब था, हम तुम्हे चाहते रहे और तुम किसी और को चाहते रहे।

किस्मत का भी खेल बहुत अजीब था, हम तुम्हे चाहते रहे और तुम किसी और को चाहते रहे।

चल पड़े थे वो सच्ची मोहब्बत को तलाशने, समय बीतता गया उनकी मोहब्बत बदलती गई।

चल पड़े थे वो सच्ची मोहब्बत को तलाशने, समय बीतता गया उनकी मोहब्बत बदलती गई।

हो सके तो साथ बिताए पल कैद कर लूं मैं, जो ना हो खत्म ऐसा सफर शुरू कर दूं मैं।

हो सके तो साथ बिताए पल कैद कर लूं मैं, जो ना हो खत्म ऐसा सफर शुरू कर दूं मैं।

मोहताज नहीं है हम किसी के खुशियों की, आंसुओं के समंदर में गोता लगाकर खुश है।

मोहताज नहीं है हम किसी के खुशियों की, आंसुओं के समंदर में गोता लगाकर खुश है।

मैं खुद का सबसे क़रीबी हो गया हूँ, लगता है शायद अब मैं फ़रेबी हो गया हूँ।

मैं खुद का सबसे क़रीबी हो गया हूँ, लगता है शायद अब मैं फ़रेबी हो गया हूँ।

एक बात मेरे जेहन से नहीं जाती है, तुझे मेरी याद क्यों नहीं आती है।

एक बात मेरे जेहन से नहीं जाती है, तुझे मेरी याद क्यों नहीं आती है।

मुझसे जुदा हुए तो बरसों हो गये हैं, घडी अब तक पहनते हो, किसका इंतज़ार रहता हैं।

मुझसे जुदा हुए तो बरसों हो गये हैं, घडी अब तक पहनते हो, किसका इंतज़ार रहता हैं।

कम मिला सब्र कीजिए, ज्यादा मिला बांट दीजिए, जिंदगी जैसी भी है बस इसे हॅंस के गुजार दीजिए।

कम मिला सब्र कीजिए, ज्यादा मिला बांट दीजिए, जिंदगी जैसी भी है बस इसे हॅंस के गुजार दीजिए।

दुसरो की नज़रो में अच्छा बनते-बनते, अक्सर लोग अपनी नज़रो मे गिर जाते हैं।

दुसरो की नज़रो में अच्छा बनते-बनते, अक्सर लोग अपनी नज़रो मे गिर जाते हैं।

वो बेख़ुदी की रातें, और दर्द बेहिसाब लिखता, होते अगर तुम मेरे, तुम पर मैं किताब लिखता।

वो बेख़ुदी की रातें, और दर्द बेहिसाब लिखता, होते अगर तुम मेरे, तुम पर मैं किताब लिखता।

जो वक़्त बिता उसे वापस बुला न पाया, और जो छोड़ गया उसे कभी भुला न पाया।

जो वक़्त बिता उसे वापस बुला न पाया, और जो छोड़ गया उसे कभी भुला न पाया।

पैसे से तो सिर्फ ज़िन्दगी जिया जा सकता है, ज़िन्दगी मजे के साथ जीना है तो दोस्त बनाओ।

पैसे से तो सिर्फ ज़िन्दगी जिया जा सकता है, ज़िन्दगी मजे के साथ जीना है तो दोस्त बनाओ।

शीशे से हैं ख्वाब मेरे, गिरते ही टुट जाते हैं, फिर समेटना भी चाहें तो, कुछ यूँ ही अधूरे छूट जाते हैं।

शीशे से हैं ख्वाब मेरे, गिरते ही टुट जाते हैं, फिर समेटना भी चाहें तो, कुछ यूँ ही अधूरे छूट जाते हैं।

अब नहीं करते कोई शिकायत ज़िन्दगी से, एक ज़िन्दगी ही थी, वो भी रूठ गई हमसे।

अब नहीं करते कोई शिकायत ज़िन्दगी से, एक ज़िन्दगी ही थी, वो भी रूठ गई हमसे।

निकल पड़े है खुद की खोज में हम, बस अब राहों में किसी से रिश्ता नहीं बनाते।

निकल पड़े है खुद की खोज में हम, बस अब राहों में किसी से रिश्ता नहीं बनाते।

इस ज़ालिम दुनिया में इतना खो गया हूँ की मुझे हकीकत और सुपनो में फर्क ही समझ नहीं आ रहा है।

इस ज़ालिम दुनिया में इतना खो गया हूँ की मुझे हकीकत और सुपनो में फर्क ही समझ नहीं आ रहा है।

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता, कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ।

इस दौर में इंसान का चेहरा नहीं मिलता, कब से मैं नक़ाबों की तहें खोल रहा हूँ।

देखो तो ख्वाब है ज़िन्दगी, पढ़ो तो किताब है ज़िन्दगी, सुनो तो ज्ञान है ज़िन्दगी, हस्ते रहो तो आसान है ज़िन्दगी।

देखो तो ख्वाब है ज़िन्दगी, पढ़ो तो किताब है ज़िन्दगी, सुनो तो ज्ञान है ज़िन्दगी, हस्ते रहो तो आसान है ज़िन्दगी।

दुनियां की भीड़ में इस क़दर खो जाऊ की ख़ुद को अकेला मेहसूस करना ही भूल जाऊ।

दुनियां की भीड़ में इस क़दर खो जाऊ की ख़ुद को अकेला मेहसूस करना ही भूल जाऊ।

जब लोगों को पूछना होता है तो भागे चले आते हैं, जब बताना होता है तो भाग के चले जाते हैं।

जब लोगों को पूछना होता है तो भागे चले आते हैं, जब बताना होता है तो भाग के चले जाते हैं।

अपेक्षाएँ जहाँ से खत्म होती है, सुकून वहीं से शुरू होती है।

अपेक्षाएँ जहाँ से खत्म होती है, सुकून वहीं से शुरू होती है।

लोग अब मेरी वजह से खफा नहीं होते, क्यूंकि नाराज़गी जताना छोड़ दिया है मैंने।

लोग अब मेरी वजह से खफा नहीं होते, क्यूंकि नाराज़गी जताना छोड़ दिया है मैंने।

वक़्त का करम है हम पर, जो तुमसे वक़्त रहते दूर हो गए।

वक़्त का करम है हम पर, जो तुमसे वक़्त रहते दूर हो गए।

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