जिस आदमी से हमें काम लेना है, उससे हमें वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे। जैसे एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज़ में गाता है।

जिस आदमी से हमें काम लेना है, उससे हमें वही बात करनी चाहिए जो उसे अच्छी लगे। जैसे एक शिकारी हिरन का शिकार करने से पहले मधुर आवाज़ में गाता है।

नौकर को बाहर भेजने पर, भाई बंधू को संकट के समय, दोस्तों को विपत्ति में और अपनी स्त्री को धन का नष्ट हो जाने पर ही परखा जा सकता हैं।

नौकर को बाहर भेजने पर, भाई बंधू को संकट के समय, दोस्तों को विपत्ति में और अपनी स्त्री को धन का नष्ट हो जाने पर ही परखा जा सकता हैं।

वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह करीब है, भले ही वास्तविकता में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो, लेकिन जो हमारे ह्रदय में नहीं है वो करीब होते हुए भी बहुत दूर होता है।

वह जो हमारे चिंतन में रहता है वह करीब है, भले ही वास्तविकता में वह बहुत दूर ही क्यों ना हो, लेकिन जो हमारे ह्रदय में नहीं है वो करीब होते हुए भी बहुत दूर होता है।

मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

राज्य का आधार अपनी इन्द्रियों पर विजय पाना है।

राज्य का आधार अपनी इन्द्रियों पर विजय पाना है।

विद्वान के लिए इस संसार में सब मार्ग खुले रहते हैं, वे लोग कहीं भी जाते हैं तो उनका हमेशा आदर होता है।

विद्वान के लिए इस संसार में सब मार्ग खुले रहते हैं, वे लोग कहीं भी जाते हैं तो उनका हमेशा आदर होता है।

वो जो अपने परिवार से अति लगाव रखता है भय और दुख में जीता है। सभी दुखों का मुख्य कारण लगाव ही है, इसलिए खुश रहने के लिए लगाव का त्याग आवशयक है।

वो जो अपने परिवार से अति लगाव रखता है भय और दुख में जीता है। सभी दुखों का मुख्य कारण लगाव ही है, इसलिए खुश रहने के लिए लगाव का त्याग आवशयक है।

एक आदर्श पत्नी वो है जो अपने पति की सुबह माँ की तरह सेवा करे और दिन में एक बहन की तरह प्यार करे और रात में एक वेश्या की तरह खुश करे।

एक आदर्श पत्नी वो है जो अपने पति की सुबह माँ की तरह सेवा करे और दिन में एक बहन की तरह प्यार करे और रात में एक वेश्या की तरह खुश करे।

कोई भी कार्य आरंभ करने के पश्चात उस से घबराना नहीं चाहिए और ना ही उसे बीच में छोड़ना चाहिए।

कोई भी कार्य आरंभ करने के पश्चात उस से घबराना नहीं चाहिए और ना ही उसे बीच में छोड़ना चाहिए।

धनवान व्यक्ति को मित्र अपने आप ही मिल जाते हैं। धन मित्रता को जन्म देता है।

धनवान व्यक्ति को मित्र अपने आप ही मिल जाते हैं। धन मित्रता को जन्म देता है।

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