Bachchapan Shayari (बच्चपन शायरी) Hindi Mei

बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला, जब डिग्रियां समझ में आई तो पांव जलने लगे।

बचपन में भरी दुपहरी में नाप आते थे पूरा मोहल्ला, जब डिग्रियां समझ में आई तो पांव जलने लगे।

हँसते खेलते गुज़र जाये वैसी शाम नही आती, होंठो पे अब बचपन वाली मुस्कान नही आती।

हँसते खेलते गुज़र जाये वैसी शाम नही आती, होंठो पे अब बचपन वाली मुस्कान नही आती।

बहुत शौक था बचपन में दूसरों को खुश रखने का, बढ़ती उम्र के साथ वो महँगा शौक भी छूट गया।

बहुत शौक था बचपन में दूसरों को खुश रखने का, बढ़ती उम्र के साथ वो महँगा शौक भी छूट गया।

बचपन से जवानी के सफर में, कुछ ऐसी सीढ़ियाँ चढ़ते हैं.. तब रोते-रोते हँस पड़ते थे, अब हँसते-हँसते रो पड़ते हैं।

बचपन से जवानी के सफर में, कुछ ऐसी सीढ़ियाँ चढ़ते हैं.. तब रोते-रोते हँस पड़ते थे, अब हँसते-हँसते रो पड़ते हैं।

वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है, बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है।

वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है, बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है।

बचपन भी क्या खूब था , जब शामें भी हुआ करती थी, अब तो सुबह के बाद, सीधा रात हो जाती है।

बचपन भी क्या खूब था , जब शामें भी हुआ करती थी, अब तो सुबह के बाद, सीधा रात हो जाती है।

तू बचपन में ही साथ छोड़ गयी थी, अब कहाँ मिलेगी ऐ जिन्दगी, तू वादा कर किसी रोज ख़्वाब में मिलेगी।

तू बचपन में ही साथ छोड़ गयी थी, अब कहाँ मिलेगी ऐ जिन्दगी, तू वादा कर किसी रोज ख़्वाब में मिलेगी।

वो पुरानी साईकिल वो पुराने दोस्त जब भी मिलते है, वो मेरे गांव वाला पुराना बचपन फिर नया हो जाता है।

वो पुरानी साईकिल वो पुराने दोस्त जब भी मिलते है, वो मेरे गांव वाला पुराना बचपन फिर नया हो जाता है।

ऐ जिंदगी तू ले चल मुझे, बचपन के उस गलियारे में, जहाँ मिलती थी हमें खुशियाँ, गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह रचाने में।

ऐ जिंदगी तू ले चल मुझे, बचपन के उस गलियारे में, जहाँ मिलती थी हमें खुशियाँ, गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह रचाने में।

कोई तो रुबरु करवाओ बेखोफ़ हुए बचपन से, मेरा फिर से बेवजह मुस्कुराने का मन हैं।

कोई तो रुबरु करवाओ बेखोफ़ हुए बचपन से, मेरा फिर से बेवजह मुस्कुराने का मन हैं।

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