Home shayari 2 Lines Dooriyan Shayari (Hindi Mei) | दूर होने की शायरी

2 Lines Dooriyan Shayari (Hindi Mei) | दूर होने की शायरी

by BstStatus Author
ये दूरियां ना होती हमारे दर्मियां, काश कभी जो सुन लेते तुम मेरी ये खामोशियां।

ये दूरियां ना होती हमारे दर्मियां, काश कभी जो सुन लेते तुम मेरी ये खामोशियां।

कहने को तो तुम्हें नजरअंदाज कर रहा हूँ, न चाहते हुए भी तुमसे अब दूर जा रहा हूँ, दूरियां बनाकर भी क्या कर लिया तुमने, रहते तो आज भी मेरे दिल में ही हो।

कहने को तो तुम्हें नजरअंदाज कर रहा हूँ, न चाहते हुए भी तुमसे अब दूर जा रहा हूँ, दूरियां बनाकर भी क्या कर लिया तुमने, रहते तो आज भी मेरे दिल में ही हो।

कभी तो आ बैठ मेरे पास थोड़ा बतियाते है, बढ़ रही है जो दूरियां उन दूरियों को मिटाते हैं।

कभी तो आ बैठ मेरे पास थोड़ा बतियाते है, बढ़ रही है जो दूरियां उन दूरियों को मिटाते हैं।

थोड़ा थोड़ा पास आने से नज़दीकियां बढ़ती हैं, और थोड़ा थोड़ा दूर जाने से दूरियाँ।

थोड़ा थोड़ा पास आने से नज़दीकियां बढ़ती हैं, और थोड़ा थोड़ा दूर जाने से दूरियाँ।

दोनों के बीच की दूरिया बता रही है आज, कि रिश्ता कितने क़रीब का था दोनों का।

दोनों के बीच की दूरिया बता रही है आज, कि रिश्ता कितने क़रीब का था दोनों का।

रिश्तों में दूरियां कभी इतनी मत बढ़ा लेना, के दरवाज़ा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े।

रिश्तों में दूरियां कभी इतनी मत बढ़ा लेना, के दरवाज़ा खुला हो फिर भी खटखटाना पड़े।

मीलों की दूरियां पर धड़कनों के क़रीब हैं, देखिए ना दूर होके भी हम कितने नज़दीक हैं।

मीलों की दूरियां पर धड़कनों के क़रीब हैं, देखिए ना दूर होके भी हम कितने नज़दीक हैं।

कुछ हमें भी बता देते यूं दूरियां न जताते, इल्ज़ाम हज़ारों लगाये, ख़ता भी बता जाते।

कुछ हमें भी बता देते यूं दूरियां न जताते, इल्ज़ाम हज़ारों लगाये, ख़ता भी बता जाते।

तकलीफ देकर ही सुकून आता है तो हमे वो भी मंजूर है, दूर होकर ही पास आना है तो हमें वो भी मंजूर है।

तकलीफ देकर ही सुकून आता है तो हमे वो भी मंजूर है, दूर होकर ही पास आना है तो हमें वो भी मंजूर है।

दूरियों का भी अपना मजा है, दर्द और अहमियत की अच्छी सीख जो दे जाता है।

दूरियों का भी अपना मजा है, दर्द और अहमियत की अच्छी सीख जो दे जाता है।

दूरियां बढ़ना लाज़मी था, प्यार हमारा एकतरफा जो था।

दूरियां बढ़ना लाज़मी था, प्यार हमारा एकतरफा जो था।

तेरी तस्वीरों को ही सीने से लगा लेते हैं, दूरियों को हम कुछ इस तरह मिटा लेते हैं।

तेरी तस्वीरों को ही सीने से लगा लेते हैं, दूरियों को हम कुछ इस तरह मिटा लेते हैं।

ये कैसी मजबूरी है?, पास है वो, फिर भी मीलों सी दूरी है।

ये कैसी मजबूरी है?, पास है वो, फिर भी मीलों सी दूरी है।

नफरतों के बाज़ार में कीमत सिर्फ बदले की होती हैं, उम्मीदों के भाव गिरते हैं, और दूरियां पनपती हैं ।

नफरतों के बाज़ार में कीमत सिर्फ बदले की होती हैं, उम्मीदों के भाव गिरते हैं, और दूरियां पनपती हैं ।

हम बताएंगे भी नहीं जताएंगे भी नहीं, दूरी बना कर रखेगे मिटाएंगे भी नहीं।

हम बताएंगे भी नहीं जताएंगे भी नहीं, दूरी बना कर रखेगे मिटाएंगे भी नहीं।

कुछ अनकहे लफ़्ज़ों को कुचलकर निकलती हैं, ये दूरियां भी रोज कातिल बनकर निकलती हैं।

कुछ अनकहे लफ़्ज़ों को कुचलकर निकलती हैं, ये दूरियां भी रोज कातिल बनकर निकलती हैं।

उसकी बेरुखी और मेरी खुदगर्ज़ी, अक्सर दूरियां ले आती हैं।

उसकी बेरुखी और मेरी खुदगर्ज़ी, अक्सर दूरियां ले आती हैं।

जो रिश्ते दिल से बनाए जाते है, वो दूर रहने पर भी दिल के सबसे करीब पाए जाते है।

जो रिश्ते दिल से बनाए जाते है, वो दूर रहने पर भी दिल के सबसे करीब पाए जाते है।

दूरियां खंजर सी चुभ रही हैं, करीबियत की धार कुछ ज्यादा ही है।

दूरियां खंजर सी चुभ रही हैं, करीबियत की धार कुछ ज्यादा ही है।

दूरियों का एहसास उस वक़्त हुआ, जब मैं उसके सामने से गुजरी, और उसे मेरी मौजूदगी का एहसास तक ना हुआ।

दूरियों का एहसास उस वक़्त हुआ, जब मैं उसके सामने से गुजरी, और उसे मेरी मौजूदगी का एहसास तक ना हुआ।

दूरियां दिल की होती तो खत्म कर देते, दूरियां तो दिमाग की थी,कैसे खत्म करते।

दूरियां दिल की होती तो खत्म कर देते, दूरियां तो दिमाग की थी,कैसे खत्म करते।

ख़्वाबों में भी ख़्वाब बनकर आते हो, जाना इतनी दूरियां कहा से लाते हो।

ख़्वाबों में भी ख़्वाब बनकर आते हो, जाना इतनी दूरियां कहा से लाते हो।

दूर ही थे तो अच्छा था, करीब आकर दूरियां बढ़ा दी हमने।

दूर ही थे तो अच्छा था, करीब आकर दूरियां बढ़ा दी हमने।

फासलो से अगर मुस्कुराहट लौट आए तुम्हारी, तो तुम्हे हक है दूरियां बढ़ा लो तुम।

फासलो से अगर मुस्कुराहट लौट आए तुम्हारी, तो तुम्हे हक है दूरियां बढ़ा लो तुम।

आलम बेवफाई का कुछ इस कदर बढ़ गया, फासला तय होता रहा और दूरियां बढ़ती गई।

आलम बेवफाई का कुछ इस कदर बढ़ गया, फासला तय होता रहा और दूरियां बढ़ती गई।

हमारे बीच जो ये दूरियां आयी है, कही न कही इन फासलों के पिछे सारे फैसले तुम्हारे ही तो है।।

हमारे बीच जो ये दूरियां आयी है, कही न कही इन फासलों के पिछे सारे फैसले तुम्हारे ही तो है।।

कभी कभी रिश्तों में दूरियां भी जरूरी होती है, अक्सर ज्यादा पास रहने से रिश्ते बोझ लगने लगते है।

कभी कभी रिश्तों में दूरियां भी जरूरी होती है, अक्सर ज्यादा पास रहने से रिश्ते बोझ लगने लगते है।

वज़ह को मिटा दो दूरियां करो ख़तम, यहां दिल के रास्ते है खुले, करीब आ जाओ तुम।

वज़ह को मिटा दो दूरियां करो ख़तम, यहां दिल के रास्ते है खुले, करीब आ जाओ तुम।

ये दूरियां ये तन्हाई, ये ग़म-ए-जुदाई, कैसे जिंदा हो तुम, कैसे जी रहे है हम।

ये दूरियां ये तन्हाई, ये ग़म-ए-जुदाई, कैसे जिंदा हो तुम, कैसे जी रहे है हम।

ये दूरियां कहां मायने रखती इश्क में, दिल-ए-मुस्कुराहट के लिए तेरी याद ही काफी है।

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