मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है, ज़िद तो उसकी है जो लकीरों में लिखा ही नही।

मिल सके आसानी से उसकी ख्वाहिश किसे है, ज़िद तो उसकी है जो लकीरों में लिखा ही नही।

तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ, तुम ऐके-47 जैसी, मैं तो एक देसी कट्टा हूँ।

तुम नई विदेशी मिक्सी हो, मैं पत्थर का सिलबट्टा हूँ, तुम ऐके-47 जैसी, मैं तो एक देसी कट्टा हूँ।

आपके शहरों में इंसान बसते है, मेरे गांव में इंसानियत।

आपके शहरों में इंसान बसते है, मेरे गांव में इंसानियत।

खैरात में मिली हुई खुशी हमें पसंद नहीं, क्योंकि हम गम में भी नवाब की तरह रहते है।

खैरात में मिली हुई खुशी हमें पसंद नहीं, क्योंकि हम गम में भी नवाब की तरह रहते है।

चाहे! कितने ही महँगे होटलों में खाना खा लो, मगर जो स्वाद चूल्हें की रोटियों में है वो और कहीं नहीं।

चाहे! कितने ही महँगे होटलों में खाना खा लो, मगर जो स्वाद चूल्हें की रोटियों में है वो और कहीं नहीं।

देसी सूँ , गवार नी! माँई-बापू का लाल सूँ , किसी पापा की परी का गुलाम नी।

देसी सूँ , गवार नी! माँई-बापू का लाल सूँ , किसी पापा की परी का गुलाम नी।

बदलना फितरत हो गई इंसान की वक्त पर, अपने अच्छे वक्त पर, दूसरो के बुरे वक्त पर।

बदलना फितरत हो गई इंसान की वक्त पर, अपने अच्छे वक्त पर, दूसरो के बुरे वक्त पर।

मुमकिन नहीं की वो बेखबर हो जज़्बात से मेरे, बात दिल कि है दिल तक तो जाती ही होगी।

मुमकिन नहीं की वो बेखबर हो जज़्बात से मेरे, बात दिल कि है दिल तक तो जाती ही होगी।

देशी व्यक्तित्व है और देशी बातें हैं हमारी, हिंदी आती है हमें अंग्रेजी कमजोर है हमारी।

देशी व्यक्तित्व है और देशी बातें हैं हमारी, हिंदी आती है हमें अंग्रेजी कमजोर है हमारी।

मैं शिकायते भी किससे करूँ, सब किस्मतों की बात है, तेरी सोच में भी नहीं हूँ मैं, मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ तू याद हैं।

मैं शिकायते भी किससे करूँ, सब किस्मतों की बात है, तेरी सोच में भी नहीं हूँ मैं, मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ तू याद हैं।

अजब रिवाज़ हैं मेरे मुल्क के यारों, अमीरों पर टैक्स नहीं गरीबों पर रहम नहीं।

अजब रिवाज़ हैं मेरे मुल्क के यारों, अमीरों पर टैक्स नहीं गरीबों पर रहम नहीं।

मुझ से दोस्त नहीं बदले जाते चाहे हो लाख दूरी, यहां लोग भगवान बदल देते है, बस एक मुराद पूरी न होने पर।

मुझ से दोस्त नहीं बदले जाते चाहे हो लाख दूरी, यहां लोग भगवान बदल देते है, बस एक मुराद पूरी न होने पर।

तुम नहीं समझोगे जनाब कंधे पर गमछे की अहमियत, मशहूर है गाँव में मेरे देशी होने के चर्चे।

तुम नहीं समझोगे जनाब कंधे पर गमछे की अहमियत, मशहूर है गाँव में मेरे देशी होने के चर्चे।

मेरे गांव की मिट्टी से भरता है तेरे शहर का पेट, और तेरे शहर वाले गाँव वालों को गवार कहते हैं।

मेरे गांव की मिट्टी से भरता है तेरे शहर का पेट, और तेरे शहर वाले गाँव वालों को गवार कहते हैं।

बात लगाव और एहसास की है, वरना कॉल और मैसेज तो कम्पनी वाले भी करते है।

बात लगाव और एहसास की है, वरना कॉल और मैसेज तो कम्पनी वाले भी करते है।

हक तो इतना है कि मैं तुझे तुझसे चुरा लू, पर क्या है ना कि मुझे चोरी आती नहीं।

हक तो इतना है कि मैं तुझे तुझसे चुरा लू, पर क्या है ना कि मुझे चोरी आती नहीं।

मैं मटके का पानी प्रिये, तू बिसलेरी की बोतल प्रिये।

मैं मटके का पानी प्रिये, तू बिसलेरी की बोतल प्रिये।

हम देशी है मैडम, हमे पिज़्ज़ा बर्गर नहीं दाल रोटी अच्छी लगती है।

हम देशी है मैडम, हमे पिज़्ज़ा बर्गर नहीं दाल रोटी अच्छी लगती है।

जो सुकून नही मिला मुझे विदेशी जूतों में, वो सुकून मिला मेरी बूढ़ी माँ की हवाई चप्पलों में।

जो सुकून नही मिला मुझे विदेशी जूतों में, वो सुकून मिला मेरी बूढ़ी माँ की हवाई चप्पलों में।

जब गाँव मे मकान नहीं कच्चे घर हुआ करते थे, जो गर्मी में ठंडे और सर्दियो में गर्म हुआ करते थे।

जब गाँव मे मकान नहीं कच्चे घर हुआ करते थे, जो गर्मी में ठंडे और सर्दियो में गर्म हुआ करते थे।

है दफ़न मुझमें कितनी रौनक़ें मत पूछ, हर बार उजड़ के भी बसता रहा वो शहर हूँ मैं।

है दफ़न मुझमें कितनी रौनक़ें मत पूछ, हर बार उजड़ के भी बसता रहा वो शहर हूँ मैं।

तू शहर की पढ़ी लिखी लड़की, में छोरा गांव का गवार, तू चलाती हैं स्कूटी, में रहता बुलेट पे सवार।

तू शहर की पढ़ी लिखी लड़की, में छोरा गांव का गवार, तू चलाती हैं स्कूटी, में रहता बुलेट पे सवार।

कि टूट के बिखर जाऊं मोतियों की माला नहीं हूं मैं, तुझे घुटने टेकने पर मजबूर कर दूंगा, यूपी वाला हूं मैं।

कि टूट के बिखर जाऊं मोतियों की माला नहीं हूं मैं, तुझे घुटने टेकने पर मजबूर कर दूंगा, यूपी वाला हूं मैं।

गलतियां भी होगी और गलत भी समझा जाएगा, यह ज़िन्दगी हैं जनाब यहां तारीफें भी होगी और कोसा भी जाएगा।

गलतियां भी होगी और गलत भी समझा जाएगा, यह ज़िन्दगी हैं जनाब यहां तारीफें भी होगी और कोसा भी जाएगा।

क्या है सवाल तेरा जिसका मै जवाब दू, एक पल आंखो में देख मेरी सबका हिसाब दू।

क्या है सवाल तेरा जिसका मै जवाब दू, एक पल आंखो में देख मेरी सबका हिसाब दू।

एक बार दिल से उतर जाने वाले लोग, सामने खड़े रहे तो भी नजर नहीं आते।

एक बार दिल से उतर जाने वाले लोग, सामने खड़े रहे तो भी नजर नहीं आते।

गांव से हूँ गवार मत समझना, सुन्दर नही हूँ इतना, पर दिल का बेकार मत समझना।

गांव से हूँ गवार मत समझना, सुन्दर नही हूँ इतना, पर दिल का बेकार मत समझना।

खता बस इतनी है अपनी, सादे देशी और नादान है हम, और कोई अपना जुर्म नही।

खता बस इतनी है अपनी, सादे देशी और नादान है हम, और कोई अपना जुर्म नही।

तेरा होना ही मेरे लिए खास है, तु दूर ही सही मगर मेरे पास है।

तेरा होना ही मेरे लिए खास है, तु दूर ही सही मगर मेरे पास है।

आखिरकार उसके दिल में जगह बना ही ली, बस प्यार की जगह नफऱत है।

आखिरकार उसके दिल में जगह बना ही ली, बस प्यार की जगह नफऱत है।

होते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते, कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते।

होते हैं आस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते, कुछ लोग जलते हैं मुझसे बस ख़ाक नहीं होते।

मैं पत्र करता हूँ देशी में, वो रिप्लाई करती है विदेशी में।

मैं पत्र करता हूँ देशी में, वो रिप्लाई करती है विदेशी में।

देसी काढ़े में ही मिलता, सूप-वूप में क्या मज़ा है तू क्या जाने छाँव ढूढने वाले धूप में क्या मज़ा है।

देसी काढ़े में ही मिलता, सूप-वूप में क्या मज़ा है तू क्या जाने छाँव ढूढने वाले धूप में क्या मज़ा है।

कुछ भी हो असली सुकून तो गांव में ही मिलता है, क्योंकि यहां लोग और खाना दोनों असली मिलते हैं।

कुछ भी हो असली सुकून तो गांव में ही मिलता है, क्योंकि यहां लोग और खाना दोनों असली मिलते हैं।

कदम वही थम जाते है हुजूर, जहाँ कोई कह देता है, रुकिए जरा चाय पी लीजिये।

कदम वही थम जाते है हुजूर, जहाँ कोई कह देता है, रुकिए जरा चाय पी लीजिये।

मुसीबतों, ज़िल्लतों से भरा तू अपने शहर को समझना, मेरा गाँव तो खजाना है शुकून-ए-जन्नत से भरा।

मुसीबतों, ज़िल्लतों से भरा तू अपने शहर को समझना, मेरा गाँव तो खजाना है शुकून-ए-जन्नत से भरा।

बचपन हमारा अपने सपनों को मुट्ठी में करने का था, अब तो हम शुद्ध देसी बेरोजगार है।

बचपन हमारा अपने सपनों को मुट्ठी में करने का था, अब तो हम शुद्ध देसी बेरोजगार है।

शाखाओं से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम, इन आँधियों से कह दो ज़रा अपनी औकात में रहे।

शाखाओं से टूट जाए वो पत्ते नहीं हैं हम, इन आँधियों से कह दो ज़रा अपनी औकात में रहे।

देशी में जो बात है, वो विदेशी में कहा, अपनों में जो प्यार है, वो परायों में कहा।

देशी में जो बात है, वो विदेशी में कहा, अपनों में जो प्यार है, वो परायों में कहा।

तुम तो डर गए एक ही कसम से, हमे तो तुम्हारी कसम देकर हजारो ने लुटा है।

तुम तो डर गए एक ही कसम से, हमे तो तुम्हारी कसम देकर हजारो ने लुटा है।

हमे अपनी महफ़िलो में न बुलाया कर मेरे यार, मुझे तो आज भी फर्स पर बैठ कर खाने की आदत है।

हमे अपनी महफ़िलो में न बुलाया कर मेरे यार, मुझे तो आज भी फर्स पर बैठ कर खाने की आदत है।

तू मॉडर्न शहर की छोरी, मैं गांव का सिम्पल छोरा प्रिये, मैं क्यूट देशी मुण्डा, तू ऐट्टिटयूड वाली प्रिये।

तू मॉडर्न शहर की छोरी, मैं गांव का सिम्पल छोरा प्रिये, मैं क्यूट देशी मुण्डा, तू ऐट्टिटयूड वाली प्रिये।

गाँव और शहर के लोगों मे बस उतना ही फर्क होता है जितना कि धरती और गमले मे उगे पौधौ मे होता हैं।

गाँव और शहर के लोगों मे बस उतना ही फर्क होता है जितना कि धरती और गमले मे उगे पौधौ मे होता हैं।

हमारी पहचान हमसे ही है, किसी और से नहीं, हम देशी हैं हमें विदेशी बनने का कोई शौक नहीं।

हमारी पहचान हमसे ही है, किसी और से नहीं, हम देशी हैं हमें विदेशी बनने का कोई शौक नहीं।

मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है।

मेरी आँखों में आँसू नहीं, बस कुछ नमी है, वजह तू नहीं, तेरी ये कमी है।

उड़ा देती है नींद कुछ ज़िम्मेदारियां वरना देर रात तक जागने वाला हर इंसान आलसी नही होता।

उड़ा देती है नींद कुछ ज़िम्मेदारियां वरना देर रात तक जागने वाला हर इंसान आलसी नही होता।

बरेली का झुमका और लहेंगा चोली, पहने जब क्या लगती है देशी छोरी।

बरेली का झुमका और लहेंगा चोली, पहने जब क्या लगती है देशी छोरी।

आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले, जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए।

आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले, जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए।

समझने के लिए दिल नही दिमाक चाहिए, जिनको हमसे आपत्ति हो वो हमसे दूर रहिए।

समझने के लिए दिल नही दिमाक चाहिए, जिनको हमसे आपत्ति हो वो हमसे दूर रहिए।

अब टूट गया है दिल बवाल क्या करे, खुद ही किया था पसंद सवाल क्या करें।

अब टूट गया है दिल बवाल क्या करे, खुद ही किया था पसंद सवाल क्या करें।

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