अब सहारे की तो बात मत कर ऐ जालिम जिंदगी, मेरा अकेलापन ही काफी है मेरा सहारा देने के लिए।

अब सहारे की तो बात मत कर ऐ जालिम जिंदगी, मेरा अकेलापन ही काफी है मेरा सहारा देने के लिए।

ये अकेलापन क्या होता है, ये उस पेड़ में बचे आखिरी पत्ते से पूछो जारा, जिसने बस पतझड़ के आने की उम्मीद लगा रखी है।

ये अकेलापन क्या होता है, ये उस पेड़ में बचे आखिरी पत्ते से पूछो जारा, जिसने बस पतझड़ के आने की उम्मीद लगा रखी है।

क्या कहें जनाब कि अकेलापन क्यों इतना भाता है, खुद से बातों में अक्सर यू ही वक्त गुज़र जाता है।

क्या कहें जनाब कि अकेलापन क्यों इतना भाता है, खुद से बातों में अक्सर यू ही वक्त गुज़र जाता है।

जनाब जिंदगी में आकेलेपन और एहसासों के बड़ा काम होता हैं, जो दूसरे के गमों को अपनाता हैं वही इंसान होता हैं।

जनाब जिंदगी में आकेलेपन और एहसासों के बड़ा काम होता हैं, जो दूसरे के गमों को अपनाता हैं वही इंसान होता हैं।

अकेलेपन से दिल जाने क्यूँ घबरा रहा है, मुझें वो तेरी बातें फिर से याद दिला रहा है।

अकेलेपन से दिल जाने क्यूँ घबरा रहा है, मुझें वो तेरी बातें फिर से याद दिला रहा है।

मैं अकेलेपन में खुद को तुमसे छिपाते जा रहे हूँ, अपनी ही नजरों में खुद को गिराते जा रहा हूँ।

मैं अकेलेपन में खुद को तुमसे छिपाते जा रहे हूँ, अपनी ही नजरों में खुद को गिराते जा रहा हूँ।

तेरे जाने के बाद मैंने कितनों को यु आज़माया हैं, मगर कोई भी मेरे इस अकेलेपन को दूर नहीं कर पाया हैं।

तेरे जाने के बाद मैंने कितनों को यु आज़माया हैं, मगर कोई भी मेरे इस अकेलेपन को दूर नहीं कर पाया हैं।

सुबह से रात और रात से यु ही सुबह हो जाती है, ये अकेलापन खत्म होने का नाम ही नहीं लेता है।

सुबह से रात और रात से यु ही सुबह हो जाती है, ये अकेलापन खत्म होने का नाम ही नहीं लेता है।

वो जो दूर का सितारा दूर हो कर भी अपना सा लगता है, क्यूंकि वो मेरे इस अकेलेपन को अकेलापन मेहसूस ही नहीं होने देता है।

वो जो दूर का सितारा दूर हो कर भी अपना सा लगता है, क्यूंकि वो मेरे इस अकेलेपन को अकेलापन मेहसूस ही नहीं होने देता है।

ये अकेलापन सभी को काटता है, पर न कोई इसको बाँटता है, अगर जो कोई चाहे इसको बाँटना। बुरा भला कह कर सब कोई डाँटता है।

ये अकेलापन सभी को काटता है, पर न कोई इसको बाँटता है, अगर जो कोई चाहे इसको बाँटना। बुरा भला कह कर सब कोई डाँटता है।

सुन क्यूं तू मुझे हर मोड़ पर मिल जाती है, थोड़ी दूर साथ चल कर फिर तू अकेला छोड़ जाती है।

सुन क्यूं तू मुझे हर मोड़ पर मिल जाती है, थोड़ी दूर साथ चल कर फिर तू अकेला छोड़ जाती है।

क्या कहें कि अकेलापन क्यों मुझे इतना भाता है, खुद से बातों में अक्सर मेरा वक्त गुज़र जाता है

क्या कहें कि अकेलापन क्यों मुझे इतना भाता है, खुद से बातों में अक्सर मेरा वक्त गुज़र जाता है

बढ़ती नजदीकियों को अक्सर जुदाई में बदलते देखा है, आज सोचा अपने अकेलेपन से नजदीकी बढ़ा के तो देखूं।

बढ़ती नजदीकियों को अक्सर जुदाई में बदलते देखा है, आज सोचा अपने अकेलेपन से नजदीकी बढ़ा के तो देखूं।

आज जो अकेलेपन का एहसास हुआ है खुद को, तो बस समहाल नहीं पाया अपने आसुओं को।

आज जो अकेलेपन का एहसास हुआ है खुद को, तो बस समहाल नहीं पाया अपने आसुओं को।

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