बता किस कोने में सुखाऊँ तेरी यादें बरसात बाहर भी है और भीतर भी है।

बरसती बारिशों से बस इतना ही कहना है के इस तरह का मौसम मेरे अंदर भी रहता है।

दीवारो पर बस एक नाम लिखा था मुहब्बत बारिश की बूंदों ने उसे चूम चूम के मिटा दिया।

मैं तेरे नसीब कि बारिश नहीं जो तुझपे बरस जाऊं तुझे तक़दीर बदलनी होगी मुझे पाने के लिए।

मेरी महफ़िल में नज़्म की इरशाद अभी बाकी है कोई थोड़ा भीगा है पूरी बरसात अभी बाकी है।

कुछ तो चाहत होगी इन बूंदों की भी वरना कौन छूता है

फिर बारिश तो होनी थी हवा को दुख सुनाए थे मैनें।

तनहाई का आलम बड़ा ही सुहाना था… कुछ उनकी याद थी बाकी बारिश का जमाना था।

थे धूप से परेशां अब तकलीफ़ बारिश से शिकायतें बेशुमार हैं आदमी की फितरत में।



अब कौन से मौसम से कोई आश लगाये बरसात में भी याद ना जब उन को हम आए।

मेरा शहर तो बारिशों का घर ठहरा यहां की आँखे हो या दिल बहुत बरसती हैं।

रिम झिम रिम झिम बरस रही हैं याद तुम्हारी कतरा कतरा।

बारिश की बुंदो में झलकती हैं उसकी तस्वीर आज फिर भीग बैठे उसे पाने की चाहत में।

बारिश हो ही जाती हैं मेरे शहर में फराज कभी बादलों से तो कभी आंखों से।

मुझे मालूम है तुमने बहुत बरसातें देखी हैं मगर इन्ही आँखों से सावन हार जाता है।

उसने बना कर मेरे संग रेत का महल ना जाने क्यूँ बारिशों को खबर कर दी।

तेरा बरसना बेशक अचानक था जबकि मेरा भीगना कब से तय था।

मिलकर भी उनसे हसरत ए मुलाकत रह गई बादल तो घर आये थे बस बरसात रह गई।

बारिश की तरह तुझ पे बरसती रहे खुशियां हर बूँद तेरे दिल से हर एक गम को मिटा दे।

आज हलकी हलकी बारिश है आज सर्द हवा का रक़्स भी है आज फूल भी निखरे निखरे हैं आज उन मैं तुम्हारा अक्स भी है।

सुना है बहुत बारिश है तुम्हारे शहर में ज्यादा भीगना मत अगर धूल गई सारी ग़लतफहमियां तो फिर बहुत याद आएंगे हम।



जरा सी भी अदब नहीं हैं इस बारिश में कि उस बेवफा की तरह ये भी मुझ पर बरस जाती हैं।

वो तेरा शरमा के मुझसे यूँ लिपट जाना कसम से हर महीने में सावन सा अहसास देता है।

किस मुँह से इल्ज़ाम लगाएं बारिश की बौछारों पर हमने ख़ुद तस्वीर बनाई थी मिट्टी की दीवारों पर।

बद नसीबी का मैं कायल तो नहीं हूँ लेकिन मैंने बरसात में जलते हुए घर देखे है।

सुना है बारिश में दुआ क़बूल होती है अगर हो इज्जाजत तो मांग लू तुम्हे।

कहीं फिसल ना जाओ ज़रा संभल के रहना मौसम बारिश का भी है और मुहब्बत का भी।

ज़रा ठहरो के बारिश है यह थम जाए तो फिर जाना किसी का तुझ को छु लेना मुझे अच्छ नहीं लगता।

एक रोने से तू मिल जाए तो खुदा की कसम इस धरती पे सावन की बरसात लगा दूं।

पूछते हो ना मुझसे तुम हमेशा की मे कितना प्यार करता हू तुम्हे तो गिन लो बरसती हुई इन बूँदो को तुम।

मत पूछ कितनी मोहब्बत है मुझे उससे बारिश की बूँद भी अगर उसे छु ले तो दिल में आग लग जाती है।

एक ख्वाब ने आँखे खोली हैं क्या मोड़ आया है कहानी मे वो भीग रही थी बारिश में और आग लगी है पानी में।

मैंने उस से पुछा क्या धुप मे बारिश होती है ये सुन कर वो हँसने लगी और हँसते हँसते रोने लगी फिर धुप में बारिश होने लगी।

रहने दो अब के तुम भी मुझे पढ ना सकोगे बरसात में कागज की तरह भीग गया हूं मैं।

कहीं फिसल न जाऊं तेरे ख्यालों में चलते चलते अपनी यादों को रोको मेरे शहर में बारिश हो रही है।

जब तेज़ हवायें चलती है तो जान हमारी जाती है मौसम है बारिश का और याद तुम्हारी आती है।

मासूम मोहब्बत का बस इतना सा फ़साना है कागज़ की कश्ती और बारिश का ज़माना है।

मै आज भी अपने मुकद्दर से शर्त लगाता हूँ भरी बरसात में कागज की पतंग उड़ाता हूँ।

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