दुनिया आपको चढाएगी और कभी गिराएगी, दुनिया का काम ही यही है, बस आपको इन सब बातो का कोई भी फर्क नहीं होना चाहिए।
-संदीप माहेश्वरी

दुनिया आपको चढाएगी और कभी गिराएगी, दुनिया का काम ही यही है, बस आपको इन सब बातो का कोई भी फर्क नहीं होना चाहिए। -संदीप माहेश्वरी

कोई भी किसी से कम नहीं है, जैसा वो सोच रहा होता है वैसा ही वो बन रहा होता है।
-संदीप माहेश्वरी

कोई भी किसी से कम नहीं है, जैसा वो सोच रहा होता है वैसा ही वो बन रहा होता है। -संदीप माहेश्वरी

सही ट्रैक क्या है? हर सिचुएशन की पॉजिटिव साइड को देखना ही सही ट्रैक है।
-संदीप माहेश्वरी

सही ट्रैक क्या है? हर सिचुएशन की पॉजिटिव साइड को देखना ही सही ट्रैक है। -संदीप माहेश्वरी

खाली कभी मत बैठो हर वक्त कुछ न कुछ सीखते रहो, और 24 घंटे सीखते रहो इस तरह से चलने से आने वाले टाइम में लोग आपको कहेगे कि आप बहुत बदल गये तब आप सक्सेसफुल बन जाओगे।

खाली कभी मत बैठो हर वक्त कुछ न कुछ सीखते रहो, और 24 घंटे सीखते रहो इस तरह से चलने से आने वाले टाइम में लोग आपको कहेगे कि आप बहुत बदल गये तब आप सक्सेसफुल बन जाओगे।

अपने हर सेशन से पहले 15 से 20 मिनट के लिए मैं अपनी आँखे बंद कर लेता हूँ और जब दिमाग पुरे तरीके से ब्लेंक हो जाता है, दिमाग में कोई विचार नहीं होते, तो अपने आप से एक सवाल करता हूँ, की अगर यह दिन मेरी जिंदगी का आखिरी दिन हो, और कैसे भी मुझे यह पता लग जाये की कल सुबह मैं नहीं उठने वाला तो मैं आज क्या करुगा, तो मैं यह आप्शन चुनता हूँ कि उस आखिरी दिन में कुछ ऐसा कर जाऊ कि यह जानने के बावजूद भी की मैं कल सुबह नहीं उठाते वाला फिर भी आज चेन की नींद सो सकू।

अपने हर सेशन से पहले 15 से 20 मिनट के लिए मैं अपनी आँखे बंद कर लेता हूँ और जब दिमाग पुरे तरीके से ब्लेंक हो जाता है, दिमाग में कोई विचार नहीं होते, तो अपने आप से एक सवाल करता हूँ, की अगर यह दिन मेरी जिंदगी का आखिरी दिन हो, और कैसे भी मुझे यह पता लग जाये की कल सुबह मैं नहीं उठने वाला तो मैं आज क्या करुगा, तो मैं यह आप्शन चुनता हूँ कि उस आखिरी दिन में कुछ ऐसा कर जाऊ कि यह जानने के बावजूद भी की मैं कल सुबह नहीं उठाते वाला फिर भी आज चेन की नींद सो सकू।

ध्यान एक यातना नहीं होना चाहिए। यह मजेदार होना चाहिए। कम से शुरू करे! 5 से 10 मिनट एक दिन में अच्छी शुरुवात है।
-संदीप माहेश्वरी

ध्यान एक यातना नहीं होना चाहिए। यह मजेदार होना चाहिए। कम से शुरू करे! 5 से 10 मिनट एक दिन में अच्छी शुरुवात है। -संदीप माहेश्वरी

ज़िन्दगी बिना किसी उद्देश्य के अर्थहीन है।
-संदीप माहेश्वरी

ज़िन्दगी बिना किसी उद्देश्य के अर्थहीन है। -संदीप माहेश्वरी

जैसे-जैसे आपके अन्दर यह डिजायर पनपेगा कि कुछ अच्छा करना है इस दुनिया के लिए, तो वो कब कर पाओगे? जब आप अन्दर से स्ट्रोंग हो, वो सिर्फ तब कर सकते हो जब पूरी तरह से यह डिजायर आपके ऊपर हावी हो जाये कि मर जाउगा, कट जाऊँगा, इस दुनिया के अन्दर अँधेरा है न, खुद को जला दूंगा, तपा दूंगा लेकिन रौशनी कर जाऊँगा।

जैसे-जैसे आपके अन्दर यह डिजायर पनपेगा कि कुछ अच्छा करना है इस दुनिया के लिए, तो वो कब कर पाओगे? जब आप अन्दर से स्ट्रोंग हो, वो सिर्फ तब कर सकते हो जब पूरी तरह से यह डिजायर आपके ऊपर हावी हो जाये कि मर जाउगा, कट जाऊँगा, इस दुनिया के अन्दर अँधेरा है न, खुद को जला दूंगा, तपा दूंगा लेकिन रौशनी कर जाऊँगा।

मैं अपने सेमिनार्स फ्री में करता हूँ जिंदगी में कभी कोई भूखा मिले तो उसे खाना खिला देना, मुझे मेरे पैसे मिल जायेंगे।
-संदीप माहेश्वरी

मैं अपने सेमिनार्स फ्री में करता हूँ जिंदगी में कभी कोई भूखा मिले तो उसे खाना खिला देना, मुझे मेरे पैसे मिल जायेंगे। -संदीप माहेश्वरी

हमेशा याद रखो, आप अपनी प्रॉब्लम से कई गुना बड़े हो।
-संदीप माहेश्वरी

हमेशा याद रखो, आप अपनी प्रॉब्लम से कई गुना बड़े हो। -संदीप माहेश्वरी

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here