मनुष्य हर शरीर के साथ ही अपने जन्म के कर्मों का फल पाता है।

मनुष्य हर शरीर के साथ ही अपने जन्म के कर्मों का फल पाता है।

मित्रता उस स्थान के लोगों से की जानी चाहिए जहां पर शर्म, चतुरता, त्याग जैसी आदतें अवश्य हो।

मित्रता उस स्थान के लोगों से की जानी चाहिए जहां पर शर्म, चतुरता, त्याग जैसी आदतें अवश्य हो।

कठोर वाणी अग्नि दाह से भी अधिक तीव्र दुःख पहुँचाती है।

कठोर वाणी अग्नि दाह से भी अधिक तीव्र दुःख पहुँचाती है।

एक इंसान कभी इमानदार नहीं हो सकता। सीधे पेड़ हमेशा पहले काटे जाते है और इमानदार लोग पहले ही ढीले (मरियल) होते है।

एक इंसान कभी इमानदार नहीं हो सकता। सीधे पेड़ हमेशा पहले काटे जाते है और इमानदार लोग पहले ही ढीले (मरियल) होते है।

ये मत सोचो की प्यार और लगाव एक ही चीज है। दोनों एक दूसरे के दुश्मन हैं। ये लगाव ही है जो प्यार को खत्म कर देता है।

ये मत सोचो की प्यार और लगाव एक ही चीज है। दोनों एक दूसरे के दुश्मन हैं। ये लगाव ही है जो प्यार को खत्म कर देता है।

अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है, मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

अपमानित हो के जीने से अच्छा मरना है, मृत्यु तो बस एक क्षण का दुःख देती है, लेकिन अपमान हर दिन जीवन में दुःख लाता है।

जो लोगो पर कठोर से कठोर सजा को लागू करता है। वो लोगो की नजर में घिनौना बनता जाता है, जबकि नरम सजा लागू करता है। वह तुच्छ बनता है। लेकिन जो योग्य सजा को लागू करता है वह सम्माननीय कहलाता है।

जो लोगो पर कठोर से कठोर सजा को लागू करता है। वो लोगो की नजर में घिनौना बनता जाता है, जबकि नरम सजा लागू करता है। वह तुच्छ बनता है। लेकिन जो योग्य सजा को लागू करता है वह सम्माननीय कहलाता है।

कोई भी शिक्षक कभी साधारण नही होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है।

कोई भी शिक्षक कभी साधारण नही होता, प्रलय और निर्माण उसकी गोद मे पलते है।

जैसी हमारी भावना होती है हमें वैसा ही फल मिलता है।

जैसी हमारी भावना होती है हमें वैसा ही फल मिलता है।

स्वभाव का अतिक्रमण अत्यंत कठिन है।

स्वभाव का अतिक्रमण अत्यंत कठिन है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here