ज़िन्दगी के कमरे में एक बचपन का कोना है, समेटनी हैं उसकी यादें, और उन यादों में खोना है।

ज़िन्दगी के कमरे में एक बचपन का कोना है, समेटनी हैं उसकी यादें, और उन यादों में खोना है।

शरारत करने का मन तो अब भी करता हैं, पता नही बचपन ज़िंदा हैं या ख़्वाहिशें अधूरी हैं।

शरारत करने का मन तो अब भी करता हैं, पता नही बचपन ज़िंदा हैं या ख़्वाहिशें अधूरी हैं।

फिर से नज़र आएंगे किसी और में हमारे ये पल सारे, बचपन के सुनहरे दिन सारे।

फिर से नज़र आएंगे किसी और में हमारे ये पल सारे, बचपन के सुनहरे दिन सारे।

ए ज़िंदगी! तू मेरी बचपन की गुड़िया जैसी बन जा, ताकि जब भी मैं जगाऊँ तू जग जा।

ए ज़िंदगी! तू मेरी बचपन की गुड़िया जैसी बन जा, ताकि जब भी मैं जगाऊँ तू जग जा।

खेलना है मुझे मेरी माँ की गोद में, के फिर लौट के आजा मेरे बचपन।

खेलना है मुझे मेरी माँ की गोद में, के फिर लौट के आजा मेरे बचपन।

कभी कभी लगता है लौट आए वो बचपन फिर से, औऱ भूल जाए खुदको पापा की गोद मे।

कभी कभी लगता है लौट आए वो बचपन फिर से, औऱ भूल जाए खुदको पापा की गोद मे।

वो रेत पर भी लिख देता था अपनी कहानी, वो बचपन था उसे माफ़ थी अपनी नादानी।

वो रेत पर भी लिख देता था अपनी कहानी, वो बचपन था उसे माफ़ थी अपनी नादानी।

गुम सा गया है अब कही बचपन, जो कभी सुकून दिया करता था।

गुम सा गया है अब कही बचपन, जो कभी सुकून दिया करता था।

हर एक पल अब तो बस गुज़रे बचपन की याद आती है, ये बड़े होकर माँ दुनिया ऐसे क्यों बदल जाती है।

हर एक पल अब तो बस गुज़रे बचपन की याद आती है, ये बड़े होकर माँ दुनिया ऐसे क्यों बदल जाती है।

ज़िन्दगी वक्त से पहले उम्र के तजुर्बे दे जाती है, बालों की रंगत ना देखिए जिम्मेदारी बचपन ले जाती है।

ज़िन्दगी वक्त से पहले उम्र के तजुर्बे दे जाती है, बालों की रंगत ना देखिए जिम्मेदारी बचपन ले जाती है।

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