Quotes On Bachpan In Hindi

बचपन मासूमियत, आश्चर्य और अन्वेषण का समय है। यह शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह से सीखने और बढ़ने का समय है। कई लोगों के लिए, बचपन उनके जीवन का सबसे खुशनुमा और सबसे लापरवाह समय होता है।

बचपन के दौरान हम चलना, बात करना और दूसरों के साथ बातचीत करना सीखते हैं। हम स्वयं की भावना और दुनिया में अपनी जगह विकसित करते हैं। हम अपने आस-पास के लोगों और चीजों के बारे में खेल, अन्वेषण और सामाजिक संपर्क के माध्यम से सीखते हैं।

बचपन भी खोज और कल्पना का समय है। बच्चे स्वाभाविक रूप से उत्सुक होते हैं और अपने आसपास की दुनिया के बारे में जानने के लिए प्यार करते हैं। वे लगातार सवाल पूछ रहे हैं और नए अनुभव तलाश रहे हैं। यह जिज्ञासा उनके बढ़ने और विकसित होने पर उनकी रुचियों और जुनून को आकार देने में मदद करती है।

बचपन के सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक वह रिश्ता है जो बच्चे अपने देखभाल करने वालों और प्रियजनों के साथ बनाते हैं। ये रिश्ते सुरक्षा और समर्थन की भावना प्रदान करते हैं, और बच्चों को प्यार और मूल्यवान महसूस करने में मदद करते हैं।

बचपन जीवन का एक विशेष समय होता है जिसे मनाया जाना चाहिए और संजोना चाहिए। यह हमारे आसपास की दुनिया को सीखने, बढ़ने और खोजने का समय है। यह लापरवाह होने और जीवन के सरल सुखों का आनंद लेने का समय है।

Childhood is a time of innocence, wonder, and exploration. It is a time of learning and growing, both physically and emotionally. For many people, childhood is the happiest and most carefree time of their lives.

During childhood, we learn to walk, talk, and interact with others. We develop our sense of self and our place in the world. We learn about the people and things around us through play, exploration, and social interaction.

Childhood is also a time of discovery and imagination. Children are naturally curious and love to learn about the world around them. They are constantly asking questions and seeking out new experiences. This curiosity helps to shape their interests and passions as they grow and develop.

One of the most important aspects of childhood is the relationships that children form with their caregivers and loved ones. These relationships provide a sense of security and support, and help children to feel loved and valued.

Childhood is a special time in life that should be celebrated and cherished. It is a time to learn, grow, and discover the world around us. It is a time to be carefree and to enjoy the simple pleasures of life.

Quotes On Bachpan In Hindi

अल्लाह फिर से लौटा दे मुझे वो बचपन के दिन, ज़िन्दगी में कम से कम सुकून से बैठने के लिए रविवार का इंतज़ार तो नहीं करना पड़ेगा।


कभी कंचे तो कभी लट्टू बचपन में खिलौने कम नहीं थे, पर बचपन के दिन काफी कम थे।


वो पुरानी साईकिल ,,वो पुराने दोस्त जब भी मिलते है,, वो मेरे गांव वाला पुराना बचपन फिर नया हो जाता है.


नींद तो बचपन में आती थी,, अब तो बस थक कर सो जाते है..


बचपन को कैद किया उम्मीदों के पिंजरों मे,, एक दिन उड़ने लायक कोई परिंदा नही बचेगा..


कोई मुझको लौटा दे वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी………!!


बचपन में जहां चाहा हंसा करते थे जहां चाहा रोया करते थे,  पर अब मुस्काने के लिए भी तमीज़ चाहिए और आंसूओं को तन्हाई…….!!


खुदा अबके जो मेरी कहानी लिखना, बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना……..!!


बचपन में भरी दुपहरी नाप आते थे पूरा गाँव,  जब से डिग्रियाँ समझ में आई, पाँव जलने लगे…….!!


कितना आसान था बचपन में सुलाना हम को, नींद आ जाती थी परियों की कहानी सुन कर………!!


मैं उसको छोड़ नहीं पाया बुरी लतों की तरह,  वो मेरे साथ है बचपन की आदतों की तरह……..!!


चलो के आज बचपन का कोई खेल खेलें, बडी मुद्दत हुई बेवजाह हँसकर नही देखा……..!!


बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी, अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है……..!!


फिर से बचपन लौट रहा है शायद, जब भी नाराज होता हूँ खाना छोड़ देता हूँ……….!!


मुखौटे बचपन में देखे थे, मेले में टंगे हुए, समझ बढ़ी तो देखा लोगों पे चढ़े हुए……..!!


लगता है माँ बाप ने बचपन में खिलौने नहीं दिए, तभी तो पगली हमारे दिल से खेल गयी………!!


मुझे फिर से थमा दे ओ माँ, वही मेरे स्कूल का बैग, अब मुझे और नहीं सहा जाता, इस जिन्दगी का भारी बोझ……….!!


रोने की वजह भी न थी, न हंसने का बहाना था, क्यों हो गए हम इतने बडे, इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था…….!!


वो बचपन की नींद अब ख्वाब हो गई, क्या उम्र थी कि, शाम हुई और सो गये………!!


हंसने की भी, वजह ढूँढनी पड़ती है अब, शायद मेरा बचपन, खत्म होने को है………!!


उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में, फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते………..!!


चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से, वो बचपन की तरह फिर से मोहब्बत नाप लेते हैं……..!!


देखो बचपन में तो बस शैतान था, मगर अब खूंखार बन गया हूँ…….!!


याद आता है वो बीता बचपन, जब खुशियाँ छोटी होती थी, बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना, तारे तोड़ने जितनी ख़ुशी देता था……….!!


जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह, मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे…….!!


तभी तो याद है हमे, हर वक़्त बस बचपन का अंदाज, आज भी याद आता है, बचपन का वो खिल – खिलाना, दोस्तों से लड़ना, रूठना, मनाना……….!!


याद आता है वो बीता बचपन, जब खुशियाँ छोटी होती थी, बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना, तारे तोड़ने जितनी ख़ुशी देता था………!!


मोहल्ले में अब रहता है, पानी भी हरदम उदास, सुना है पानी में नाव चलाने, वाले बच्चे अब बड़े हो गए……….!!


बचपन में कितने रईस थे हम, ख्वाहिशें थी छोटी-छोटी, बस हंसना और हंसाना, कितना बेपरवाह था वो बचपन………!!


मुझे फिर से थमा दे ओ माँ, वही मेरे स्कूल का बैग, अब मुझे और नहीं सहा जाता, इस जिन्दगी का भारी बोझ………!!


बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थे, तब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे, अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होता,और बचपन में जी भरकर रोया करते थे……….!!


किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश, तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की………!!


चले आओ कभी टूटी हुई चूड़ी के टुकड़े से, वो बचपन की तरह फिर से मोहब्बत नाप लेते हैं……….!!


काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था, खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था, कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में, वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था………!!


अजीब सौदागर है ये वक़्त भी, जवानी का लालच दे के बचपन ले गया………..!!


आते जाते रहा कर ए दर्द, तू तो मेरा बचपन का साथी है………!!


देर तक हँसता रहा उन पर हमारा बचपना, जब तजुर्बे आए थे संजीदा बनाने के लिए………!!


हंसने की भी, वजह ढूँढनी पड़ती है अब, शायद मेरा बचपन, खत्म होने को है……….!!


बचपन में तो शामें भी हुआ करती थी, अब तो बस सुबह के बाद रात हो जाती है………!!


जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह, मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे……….!!


खुदा अबके जो मेरी कहानी लिखना, बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना……..!!


कोई मुझको लौटा दे वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी……..!!


आजकल आम भी पेड़ से खुद गिरके टूट जाया करते हैं,छुप छुप के इन्हें तोड़ने वाला अब बचपन नहीं रहा……..!!


चलो के आज बचपन का कोई खेल खेलें,बडी मुद्दत हुई बेवजाह हँसकर नहीं देखा………!!


कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन, सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी………..!!


किसने कहा नहीं आती वो बचपन वाली बारिश,तुम भूल गए हो शायद अब नाव बनानी कागज़ की…….!!


सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त, बचपन वाला इतवार अब नहीं आता………!!


काग़ज़ की कश्ती थी पानी का किनारा था,खेलने की मस्ती थी ये दिल अवारा था, कहाँ आ गए इस समझदारी के दलदल में,वो नादान बचपन भी कितना प्यारा था……..!!


बचपन भी कमाल का था, खेलते खेलते चाहें छत पर सोयें, या ज़मीन पर, आँख बिस्तर पर ही खुलती थी………!!


झूठ बोलते थे फिर भी कितने सच्चे थे हम, ये उन दिनों की बात है जब बच्चे थे हम…….!!


ना कुछ पाने की आशा ना कुछ खोने का डर, बस अपनी ही धुन, अपने सपनों का घर, काश मिल जाए फिर मुझे वो बचपन का पहर………!!


रोने की वजह भी न थी न हंसने का बहाना था क्यो हो गए हम इतने बडे इससे अच्छा तो वो बचपन का जमाना था..


वक्त से पहले ही वो हमसे रूठ गयी है,बचपन की मासूमियत न जाने कहाँ छूट गयी है।


बचपन के दिन भी कितने अच्छे होते थेतब दिल नहीं सिर्फ खिलौने टूटा करते थे अब तो एक आंसू भी बर्दाश्त नहीं होताऔर बचपन में जी भरकर रोया करते थे


आओ भीगे बारिश मेंउस बचपन में खो जाएंक्यों आ गए इस डिग्री की दुनिया मेंचलो फिर से कागज़ की कश्ती बनाएं।


कितने खुबसूरत हुआ करते थे बचपन के वो दिन, सिर्फ दो उंगलिया जुड़ने से, दोस्ती फिर से शुरु हो जाया करती थी।


असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझे कहाँ गया मेरा बचपन ख़राब कर के मुझे


शौक जिन्दगी के अब जरुरतो में ढल गये, शायद बचपन से निकल हम बड़े हो गये।


अजीब सौदागर है ये वक़्त भी जवानी का लालच दे के बचपन ले गया.


काश मैं लौट जाऊं… बचपन की उन हसीं वादियों में ऐ जिंदगी जब न तो कोई जरूरत थी और न ही कोई जरूरी था!


कोई मुझको लौटा दे वो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती वो बारिश का पानी।


कई सितारों को मैं जानता हूँ बचपन से कहीं भी जाऊँ मेरे साथ साथ चलते हैं


अपना बचपन भी बड़ा कमाल का हुआ करता था, ना कल की फ़िक्र ना आज का ठिकाना हुआ करता था।


जिंदगी फिर कभी न मुस्कुराई बचपन की तरह मैंने मिट्टी भी जमा की खिलौने भी लेकर देखे.


जब दिल ये आवारा था, खेलने की मस्ती थी। नदी का किनारा था, कगज की कश्ती थी। ना कुछ खोने का डर था, ना कुछ पाने की आशा थी।


एक हाथी एक राजा एक रानी के बग़ैर नींद बच्चों को नहीं आती कहानी के बग़ैर।


फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर खुशबु लगाते है वो बच्चे रेल के डिब्बों मे जो झुण्ड लगाते है।


बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए।


एक इच्छा है भगवन मुझे सच्चा बना दो, लौटा दो मेरा बचपन मुझे बच्चा बना दो।


ईमान बेचकर बेईमानी खरीद लीबचपन बेचकर जवानी खरीद ली, न वक़्त, न खुशी, न सुकून सोचता हूँ ये कैसी जिन्दगानी खरीद ली।


मुमकिन है हमें गाँव भी पहचान न पाए, बचपन में ही हम घर से कमाने निकल आए।


ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझ से मेरी जवानी मगर मुझ को लौटा दो बचपन का सावन वो काग़ज़ की कश्ती वो बारिश का पानी।


इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नहीं होती, जितनी बचपन की तस्वीर देखकर बचपन में जाने की होती है।


दूर मुझसे हो गया बचपन मगर मुझमें बच्चे सा मचलता कौन है।


दुआएँ याद करा दी गई थीं बचपन में सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम।


मेरे रोने का जिस में क़िस्सा हैउम्र का बेहतरीन हिस्सा है।


भटक जाता हूँ अक्सर खुद हीं खुद में, खोजने वो बचपन जो कहीं खो गया है।


आशियाने जलाये जाते हैं जब तन्हाई की आग से, तो बचपन के घरौंदो की वो मिट्टी याद आती है याद होती जाती है जवां बारिश के मौसम में तो, बचपन की वो कागज की नाव याद आती है।


मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी।


अब तो खुशियाँ हैं इतनी बड़ी, चाँद पर जाकर भी ख़ुशी नहीं, एक मुराद हुई पूरी कि दूसरी आ गयी, कैसे हो खुश हम, कोई बता दो, अब तो बस दुःख भी हैं इतने बड़े, कि हर बात पर दिल टुटा करता है।


देखा करो कभी अपनी माँ की आँखों में भी,ये वो आईना हैं जिसमें बच्चे कभी बूढ़े नही होते।


याद आता है वो बीता बचपन, जब खुशियाँ छोटी होती थी। बाग़ में तितली को पकड़ खुश होना, तारे तोड़ने जितनी ख़ुशी देता था।


हँसते खेलते गुज़र जाये वैसी शाम नही आती, होंठो पे अब बचपन वाली मुस्कान नही आती।


कुछ अपनी हरकतों से, तो कुछ अपनी मासूमियत से, उनको सताया था मैंने, कुछ वृद्धों और कुछ वयस्कों को, इस तरह उनके बचपन से मिलाया था मैंने।


वो बचपन की अमीरी न जाने कहां खो गई जब पानी में हमारे भी जहाज चलते थे…।


बचपन से जवानी के सफर में, कुछ ऐसी सीढ़ियाँ चढ़ते हैं.. तब रोते-रोते हँस पड़ते थे, अब हँसते-हँसते रो पड़ते हैं।


बचपन समझदार हो गया, मैं ढूंढता हू खुद को गलियों मे।। बचपन में लगी चोट पर मां की हल्‍की-हल्‍की फूँक और कहना कि बस अभी ठीक हो जाएगा! वाकई अब तक कोई मरहम वैसा नहीं बना!


पुरानी अलमारी से देख मुझे खूब मुस्कुराता है, ये बचपन वाला खिलौना मुझें बहुत सताता है।


ऐ जिंदगी तू ले चल मुझे, बचपन के उस गलियारे में, जहाँ मिलती थी हमें खुशियाँ, गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह रचाने में।


दहशत गोली से नही दिमाग से होती है, और दिमाग तो हमारा बचपन से ही खराब है.


वास्तविकता को जानकर, मेरा भी सपनों से समझौता हुआ, लोग यही समझते रहे, लो एक और बच्चा बड़ा हुआ।


खुदा अबके जो मेरी कहानी लिखना बचपन में ही मर जाऊ ऐसी जिंदगानी लिखना.


दादाजी ने सौ पतंगे लूटीं टाँके लगे, हड्डियाँ उनकी टूटी, छत से गिरे, न बताया किसी को, शैतानी करके सताया सभी को, बचपन के किस्से सुनो जी बड़ों के।


कोई तो रुबरु करवाओ बेखोफ़ हुए बचपन से, मेरा फिर से बेवजह मुस्कुराने का मन हैं।


सुकून की बात मत कर ऐ दोस्त, बचपन वाला इतवार अब नहीं आता।


ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन वो कागज़ की कश्ती, वो बारिश का पानी


मेरी दोस्ती का फायदा उठा लेना, ? क्युंकी मेरी दुश्मनी का नुकसान सह ? नही पाओगे…!


इक ? चुभन है कि जो बेचैन किए रहती ? है,ऐसा लगता है कि कुछ टूट गया है ? मुझ में.


बचपन में शौक़ से जो घरौंदे बनाए थे इक हूक सी उठी उन्हें मिस्मार देख कर

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