बहुत मतलबी निकला ए दिल तू मेरा होकर भी धड़कता तो तू मेरे सीने में है पर किसी और का होकर।

इतने कहाँ मशरूफ हो गए हो तुम आजकल दिल दुखाने भी नहीं आते।

कभी आकर देखना मेरे दिल में कि कितनी फ़ुर्सत से पलटा मेरी किस्मत का सितारा मेरे दोस्तो उसने भी छोड़ दिया और अपनों ने भी।

लोग ख़ुद पर विश्वास खोने लगे है अब तो दोस्त भी मतलबी होने लगे है।

जो सच और कड़वा बोलता है वो मतलबी और धोखेबाज नहीं होता है।

मेरे बुरे वक्त में मेरी कमियाँ गिनाने लगे है मतलबी दोस्त दोस्ती का मतलब समझाने लगे है।

कोई तुम सा भी काश तुम को मिले मुद्दआ हम को इंतिक़ाम से है।

सीख रहा हूँ मैं भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर कड़वे सच ने हमसे ना जाने कितने अज़ीज़ छीन लिए।

मैं तुम पर हर बार भरोसा करता हूँ इतना सच्चा झूठ तुम्हारा होता है।

जी बहुत चाहता है सच बोलें क्या करें हौसला नहीं होता।

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