लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे, सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है।

लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे, सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है।

मैं सभी प्राणियों को समान रूप से देखता हूँ, ना कोई मुझे कम प्रिय है ना अधिक, लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूँ।

मैं सभी प्राणियों को समान रूप से देखता हूँ, ना कोई मुझे कम प्रिय है ना अधिक, लेकिन जो मेरी प्रेमपूर्वक आराधना करते हैं वो मेरे भीतर रहते हैं और मैं उनके जीवन में आता हूँ।

प्रबुद्ध व्यक्ति सिवाय ईश्वर के किसी और पर निर्भर नहीं करता।

प्रबुद्ध व्यक्ति सिवाय ईश्वर के किसी और पर निर्भर नहीं करता।

मैं केवल भगवान् का हूँ और भगवान मेरे है ऐसा मानने मात्रा से भगवान् से सम्बन्ध जुड़ जाता है।

मैं केवल भगवान् का हूँ और भगवान मेरे है ऐसा मानने मात्रा से भगवान् से सम्बन्ध जुड़ जाता है।

सदैव सन्दहे करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न इस लोक में है न ही कही और।

सदैव सन्दहे करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता न इस लोक में है न ही कही और।

वह जो मृत्यु के समय मुझे स्मरण करते हुए अपना शरीर त्यागता है, वह मेरे धाम को प्राप्त होता है। इसमें कोई शंशय नहीं है।

वह जो मृत्यु के समय मुझे स्मरण करते हुए अपना शरीर त्यागता है, वह मेरे धाम को प्राप्त होता है। इसमें कोई शंशय नहीं है।

वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है और मैं और मेरा की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है उसे शांति प्राप्त होती है।

वह जो सभी इच्छाएं त्याग देता है और मैं और मेरा की लालसा और भावना से मुक्त हो जाता है उसे शांति प्राप्त होती है।

कर्म मुझे बांध नहीं सकता क्यों की मेरी कर्म के फल में आसक्ति नहीं है।

कर्म मुझे बांध नहीं सकता क्यों की मेरी कर्म के फल में आसक्ति नहीं है।

मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, 
फिर सब तुम्हारा है तुम सबके हो ।

मेरा-तेरा, छोटा-बड़ा, अपना-पराया, मन से मिटा दो, फिर सब तुम्हारा है तुम सबके हो ।

भगवान से ही सब उत्पन्न होता है और भगवान से ही सबकी चेष्टा हो सही है अर्थात सबके मूल में भगवान ही है।

भगवान से ही सब उत्पन्न होता है और भगवान से ही सबकी चेष्टा हो सही है अर्थात सबके मूल में भगवान ही है।

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