जो मन को नियंत्रित नहीं करते, उनके लिए वह शत्रु के सामान कार्य करता है।

जो मन को नियंत्रित नहीं करते, उनके लिए वह शत्रु के सामान कार्य करता है।

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है।

फल की अभिलाषा छोड़कर कर्म करने वाला पुरुष ही अपने जीवन को सफल बनाता है।

दैवीय सम्प्रदा से युक्त पुरुष में भय का सर्वथा आभाव और सबके प्रति प्रेम का भाव होता है।

दैवीय सम्प्रदा से युक्त पुरुष में भय का सर्वथा आभाव और सबके प्रति प्रेम का भाव होता है।

बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।

बुद्धिमान व्यक्ति कामुक सुख में आनंद नहीं लेता।

अहम् भाव ही मनुष्य में भिन्नता करने वाला है, अहम् भाव न रहने से परमात्मा के साथ भिन्नता का कोई कारण ही नहीं है।

अहम् भाव ही मनुष्य में भिन्नता करने वाला है, अहम् भाव न रहने से परमात्मा के साथ भिन्नता का कोई कारण ही नहीं है।

कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।

कर्म मुझे बांधता नहीं, क्योंकि मुझे कर्म के प्रतिफल की कोई इच्छा नहीं।

इंसान अपने विश्वास से निर्मित होता है, जिस प्रकार वह विश्वास करता है उसी प्रकार वह बन जाता है।

इंसान अपने विश्वास से निर्मित होता है, जिस प्रकार वह विश्वास करता है उसी प्रकार वह बन जाता है।

आज जो कुछ आपका है, पहले किसी और का था और भविष्य में किसी और का हो जाएगा, परिवर्तन ही संसार का नियम है।

आज जो कुछ आपका है, पहले किसी और का था और भविष्य में किसी और का हो जाएगा, परिवर्तन ही संसार का नियम है।

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है।

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, वही सही मायने में देखता है।

प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं।

प्रबुद्ध व्यक्ति के लिए, गंदगी का ढेर, पत्थर, और सोना सभी समान हैं।

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