जीवन न तो भविष्य में है न अतीत मैं, जीवन तो बस इस पल मैं है।

जीवन न तो भविष्य में है न अतीत मैं, जीवन तो बस इस पल मैं है।

अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है।

अप्राकृतिक कर्म बहुत तनाव पैदा करता है।

अपने लिए कुछ न करने से कर्मो से सम्बन्ध टूट जाता है जिसे निष्काम कर्म कहा जाता है।

अपने लिए कुछ न करने से कर्मो से सम्बन्ध टूट जाता है जिसे निष्काम कर्म कहा जाता है।

मेरे लिए ना कोई घृणित है ना प्रिय, किंतु जो व्यक्ति भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं, वह मेरे साथ हैं और मैं भी उनके साथ।

मेरे लिए ना कोई घृणित है ना प्रिय, किंतु जो व्यक्ति भक्ति के साथ मेरी पूजा करते हैं, वह मेरे साथ हैं और मैं भी उनके साथ।

मनुष्य का मन इन्द्रियों के चक्रव्यूह के कारण भ्रमित रहता है। जो वासना, लालच, आलस्य जैसी बुरी आदतों से ग्रसित हो जाता है। इसलिए मनुष्य का अपने मन एवं आत्मा पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए।

मनुष्य का मन इन्द्रियों के चक्रव्यूह के कारण भ्रमित रहता है। जो वासना, लालच, आलस्य जैसी बुरी आदतों से ग्रसित हो जाता है। इसलिए मनुष्य का अपने मन एवं आत्मा पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए।

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।

मन अशांत है और उसे नियंत्रित करना कठिन है, लेकिन अभ्यास से इसे वश में किया जा सकता है।

मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते हैं और जो मुझसे प्रेम करते हैं।

मैं उन्हें ज्ञान देता हूँ जो सदा मुझसे जुड़े रहते हैं और जो मुझसे प्रेम करते हैं।

हे पार्थ तू फल की चिंता मत कर अपना कर्त्तव्य कर्म कर।

हे पार्थ तू फल की चिंता मत कर अपना कर्त्तव्य कर्म कर।

जीवन ना तो भविष्य में है और ना ही अतीत में है,  जीवन तो केवल इस पल में है अर्थात इस पल का अनुभव ही जीवन है।

जीवन ना तो भविष्य में है और ना ही अतीत में है, जीवन तो केवल इस पल में है अर्थात इस पल का अनुभव ही जीवन है।

उत्पन्न होने वाली वस्तु तो स्वतः ही मिटती है, जो वस्तु उत्पन्न नहीं होती वह कभी नहीं मिटती। आत्मा अजर अमर है, शरीर नाशवान है।

उत्पन्न होने वाली वस्तु तो स्वतः ही मिटती है, जो वस्तु उत्पन्न नहीं होती वह कभी नहीं मिटती। आत्मा अजर अमर है, शरीर नाशवान है।

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