मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.

मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है.जैसा वो विश्वास करता है वैसा वो बन जाता है.

उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा, जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

उससे मत डरो जो वास्तविक नहीं है, ना कभी था ना कभी होगा, जो वास्तविक है, वो हमेशा था और उसे कभी नष्ट नहीं किया जा सकता।

केवल मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है ।

केवल मन ही किसी का मित्र और शत्रु होता है ।

मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ।

मैं धरती की मधुर सुगंध हूँ, मैं अग्नि की ऊष्मा हूँ, सभी जीवित प्राणियों का जीवन और सन्यासियों का आत्मसंयम हूँ।

कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।

कर्म उसे नहीं बांधता जिसने काम का त्याग कर दिया है।

मनुष्य संप्रदाय दो ही तरह के है एक दैवीय सम्प्रदा वाले एक आसुरी सम्प्रदा वाले।

मनुष्य संप्रदाय दो ही तरह के है एक दैवीय सम्प्रदा वाले एक आसुरी सम्प्रदा वाले।

जिसके लिए सुख दुःख, मान अपमान सामान है वही सिद्ध पुरुष है।

जिसके लिए सुख दुःख, मान अपमान सामान है वही सिद्ध पुरुष है।

स्वर्ग प्राप्त करने और वहां कई वर्षों तक वास करने के पश्चात एक असफल योगी का पुन: एक पवित्र और समृद्ध कुटुंब में जन्म होता है।

स्वर्ग प्राप्त करने और वहां कई वर्षों तक वास करने के पश्चात एक असफल योगी का पुन: एक पवित्र और समृद्ध कुटुंब में जन्म होता है।

मनुष्य को अपने कर्मों के संभावित परिणामों से प्राप्त होने वाली विजय या पराजय, लाभ या हानि, प्रसन्नता या दुःख इत्यादि के बारे में सोच कर चिंता से ग्रसित नहीं होना चाहिए।

मनुष्य को अपने कर्मों के संभावित परिणामों से प्राप्त होने वाली विजय या पराजय, लाभ या हानि, प्रसन्नता या दुःख इत्यादि के बारे में सोच कर चिंता से ग्रसित नहीं होना चाहिए।

बाहर का त्याग वास्तव में त्याग नहीं है, भीतर का त्याग ही त्याग है, हमारी कामना, ममता, आसक्ति ही बढ़ने वाले है, संसार नहीं।

बाहर का त्याग वास्तव में त्याग नहीं है, भीतर का त्याग ही त्याग है, हमारी कामना, ममता, आसक्ति ही बढ़ने वाले है, संसार नहीं।

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