Bachchapan Shayari (बच्चपन शायरी) Hindi Mei

खुशियाँ भी हो गई है अब उड़ती चिड़ियाँ, जाने कहाँ खो गई, वो बचपन की गुड़ियाँ।

खुशियाँ भी हो गई है अब उड़ती चिड़ियाँ, जाने कहाँ खो गई, वो बचपन की गुड़ियाँ।

शौक जिन्दगी के अब जरुरतो में ढल गये, शायद बचपन से निकल हम बड़े हो गये।

शौक जिन्दगी के अब जरुरतो में ढल गये, शायद बचपन से निकल हम बड़े हो गये।

जैसे बिन किनारे की कश्ती, वैसे ही हमारे बचपन की मस्ती।

जैसे बिन किनारे की कश्ती, वैसे ही हमारे बचपन की मस्ती।

सीखने की कोई उम्र नही होती, और फिर सीखते-सिखाते बचपन गुज़र गया।

सीखने की कोई उम्र नही होती, और फिर सीखते-सिखाते बचपन गुज़र गया।

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

नींद तो बचपन में आती थी, अब तो बस थक कर सो जाते है।

अब भी तो है बचपना, प्रेम करते हैं, पर मिल कर नहीं।

अब भी तो है बचपना, प्रेम करते हैं, पर मिल कर नहीं।

पुरानी अलमारी से देख मुझे खूब मुस्कुराता है, ये बचपन वाला खिलौना मुझें बहुत सताता है।

पुरानी अलमारी से देख मुझे खूब मुस्कुराता है, ये बचपन वाला खिलौना मुझें बहुत सताता है।

कुछ ज़्यादा नहीं बदला‌ बचपन से‌ अब तक, बस‌‌ अब वो बचपन‌ की‌ जिंद समझौते में बदल रहीं है।

कुछ ज़्यादा नहीं बदला‌ बचपन से‌ अब तक, बस‌‌ अब वो बचपन‌ की‌ जिंद समझौते में बदल रहीं है।

कुछ यूं कमाल दिखा दे ऐ जिंदगी, वो बचपन ओर बचपन के दोस्तो से मिला दे ऐ जिंदगी।

कुछ यूं कमाल दिखा दे ऐ जिंदगी, वो बचपन ओर बचपन के दोस्तो से मिला दे ऐ जिंदगी।

बस इतनी सी अपनी कहानी है, एक बदहाल-सा बचपन, एक गुमनाम-सी जवानी है।

बस इतनी सी अपनी कहानी है, एक बदहाल-सा बचपन, एक गुमनाम-सी जवानी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.