Aukat Shayari in Hindi ॥ औकात शायरी

किसी की क्या औकात बिगाड़ सके कुछ हमारा, हमने तो अपना दामन खुद ही जला रखा है।

किसी की क्या औकात बिगाड़ सके कुछ हमारा, हमने तो अपना दामन खुद ही जला रखा है।

औकात मेरी हमेशा तेरे पैरों तक ही रही, कोशिशें की मगर दिल तक न पहुंचे हम।

औकात मेरी हमेशा तेरे पैरों तक ही रही, कोशिशें की मगर दिल तक न पहुंचे हम।

कहना चाहो तो कह लो तुम काफ़िर मुझे, मैंने औकात से बाहर जाकर प्यार किया है।

कहना चाहो तो कह लो तुम काफ़िर मुझे, मैंने औकात से बाहर जाकर प्यार किया है।

औकात पे आ जाते हैं, जब हम औकात की बात करते हैं।

औकात पे आ जाते हैं, जब हम औकात की बात करते हैं।

कुछ लोग कहते हैं , मेरे सपने मेरी औकात से बड़े है, और वही लोग मेरे खिलाफ खड़े है।

कुछ लोग कहते हैं , मेरे सपने मेरी औकात से बड़े है, और वही लोग मेरे खिलाफ खड़े है।

मेरे औकात से बड़े मेरे सपने है, और मेरे ही खिलाफ खड़े आज मेरे अपने है।

मेरे औकात से बड़े मेरे सपने है, और मेरे ही खिलाफ खड़े आज मेरे अपने है।

आँखें भी अक्सर अपनी औकात भूल जाती है, खुद है दो पर सपने हजार लिए चली आती है।

आँखें भी अक्सर अपनी औकात भूल जाती है, खुद है दो पर सपने हजार लिए चली आती है।

आँखों से कहो औकात में रहे जनाब, बिना मुझसे पूछे पढ़ लेती है रूह मेरी।

आँखों से कहो औकात में रहे जनाब, बिना मुझसे पूछे पढ़ लेती है रूह मेरी।

मैं मोहब्बत में ऐसे अल्फ़ाज़ लिख देता हूँ, कलम उठा के उस बेवफा की औकात लिख देता हूं।

मैं मोहब्बत में ऐसे अल्फ़ाज़ लिख देता हूँ, कलम उठा के उस बेवफा की औकात लिख देता हूं।

मुझे मेरी ही नजरो में गिरा कर चली गई, वो आईना बन कर आई थी, मुझे मेरी औकात दिखा कर चली गई।

मुझे मेरी ही नजरो में गिरा कर चली गई, वो आईना बन कर आई थी, मुझे मेरी औकात दिखा कर चली गई।

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