Aukat Shayari in Hindi ॥ औकात शायरी

जूते फटे पहने आसमां पर पहुंचने चले थे, सपने हमेशा हमारे औकात से बड़े थे।

जूते फटे पहने आसमां पर पहुंचने चले थे, सपने हमेशा हमारे औकात से बड़े थे।

चाँद तारों पर पहुंचने का क्यों गुमां करता है तू ए इंसान, मत भूल कभी के दो मुठ्ठी रेत से ज्यादा तेरी औकात नहीं।

चाँद तारों पर पहुंचने का क्यों गुमां करता है तू ए इंसान, मत भूल कभी के दो मुठ्ठी रेत से ज्यादा तेरी औकात नहीं।

झूठ इसलिए बिक जाता है, सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती।

झूठ इसलिए बिक जाता है, सच को खरीदने की सबकी औकात नहीं होती।

मालूम है मुझे मेरी औक़ात, हर बार क्यों दिखाते हो, छोड़ना है तो छोड़ ही जाओ न, यूँ हर बार क्यों सताते हो।

मालूम है मुझे मेरी औक़ात, हर बार क्यों दिखाते हो, छोड़ना है तो छोड़ ही जाओ न, यूँ हर बार क्यों सताते हो।

किसी ने पूछा था मुझसे कमा कितना लेते हो, बस जेब या पेट नहीं, औकात भर का कमा लेता हूं।

किसी ने पूछा था मुझसे कमा कितना लेते हो, बस जेब या पेट नहीं, औकात भर का कमा लेता हूं।

लोग बातों ही बातों में हालात पूछ लेते हैं, कितना कमा लेते हो कहकर, औकात पूछ लेते हैं।

लोग बातों ही बातों में हालात पूछ लेते हैं, कितना कमा लेते हो कहकर, औकात पूछ लेते हैं।

बेवजह ही नहीं होती आंखों से बरसात, दौलत ने पूछी होगी दिलवालों की औकात।

बेवजह ही नहीं होती आंखों से बरसात, दौलत ने पूछी होगी दिलवालों की औकात।

गलती मेरी है तुझे इतनी अहमियत दे दी, तुझे तो औकात दिखाने वाला आईना देना चाहिए था।

गलती मेरी है तुझे इतनी अहमियत दे दी, तुझे तो औकात दिखाने वाला आईना देना चाहिए था।

कितनी भी शिद्दत से निभा लो रिश्तें, लोग औकात दिखा ही जाते है।

कितनी भी शिद्दत से निभा लो रिश्तें, लोग औकात दिखा ही जाते है।

मुझे लगता था कि इस मोहब्बत के शहर में, मैं बहुत अमीर हुँ, पर आज तेरे कारण मुझे मेरी औकात का पता चल गयी।

मुझे लगता था कि इस मोहब्बत के शहर में, मैं बहुत अमीर हुँ, पर आज तेरे कारण मुझे मेरी औकात का पता चल गयी।

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