Aansu Shayari | आँसू शायरी

डूब जाते हैं उम्मीदों के सफ़ीने इस में, मैं नहीं मानती आँसू ज़रा सा पानी है।

डूब जाते हैं उम्मीदों के सफ़ीने इस में, मैं नहीं मानती आँसू ज़रा सा पानी है।

मेरी आंखों के आंसू कह रहे हैं मुझसे, अब दर्द इतना है कि सहा नहीं जाता, मत रोक पलको से खुल कर छलकने दे, अब इन आँखों में थम कर रहा नहीं जाता।

मेरी आंखों के आंसू कह रहे हैं मुझसे, अब दर्द इतना है कि सहा नहीं जाता, मत रोक पलको से खुल कर छलकने दे, अब इन आँखों में थम कर रहा नहीं जाता।

काश बनाने वाले ने हमको आँसू बनाया होता, और मेहबूब की आँखों में बसाया होता, जब गिरते उनकी आँखों से उनकी ही गोद में, तो मरने का मज़ा कुछ अलग ही आया होता।

काश बनाने वाले ने हमको आँसू बनाया होता, और मेहबूब की आँखों में बसाया होता, जब गिरते उनकी आँखों से उनकी ही गोद में, तो मरने का मज़ा कुछ अलग ही आया होता।

हमें मालूम है तुमने देखी हैं बारिश की बूँदें, मगर मेरी आँखों से ये सावन आज भी हार जाता है।

हमें मालूम है तुमने देखी हैं बारिश की बूँदें, मगर मेरी आँखों से ये सावन आज भी हार जाता है।

वो मंजर ही मोहब्बत में बड़ा दिलकश गुजरा, किसी ने हाल ही पूछा था और आँखें भर आयी।

वो मंजर ही मोहब्बत में बड़ा दिलकश गुजरा, किसी ने हाल ही पूछा था और आँखें भर आयी।

अश्क बन कर आँखों से बहते हैं! बहती आँखों से उनका दीदार करते हैं! माना की ज़िंदगी मे उन्हे पा नही सकते! फिर भी हम उनसे बहुत प्यार करते हैं

अश्क बन कर आँखों से बहते हैं! बहती आँखों से उनका दीदार करते हैं! माना की ज़िंदगी मे उन्हे पा नही सकते! फिर भी हम उनसे बहुत प्यार करते हैं

रख सको तो एक निशानी हैं हम, भूल जाओ तो एक कहानी हैं हम, खुशी की धूप हो या गम के बादल, दोनो में जो बरसे वो पानी हैं हम।

रख सको तो एक निशानी हैं हम, भूल जाओ तो एक कहानी हैं हम, खुशी की धूप हो या गम के बादल, दोनो में जो बरसे वो पानी हैं हम।

कोई दुःख बसा है उनकी आँखों में शायद, या मुझे खुद ही वहम सा हुआ है शायद, जब पूछा क्या भूल गए हो हमे तुम, पोंछ कर आँसू अपनी आँख से उसने भी कहा शायद।

कोई दुःख बसा है उनकी आँखों में शायद, या मुझे खुद ही वहम सा हुआ है शायद, जब पूछा क्या भूल गए हो हमे तुम, पोंछ कर आँसू अपनी आँख से उसने भी कहा शायद।

सदफ की क्या हकीकत है, अगर उसमें न हो गौहर, न क्यों कर आबरू हो आंख की मौकूफ आंसू पर।

सदफ की क्या हकीकत है, अगर उसमें न हो गौहर, न क्यों कर आबरू हो आंख की मौकूफ आंसू पर।

डूब जाते हैं उम्मीदों के सफ़ीने इस में, मैं नहीं मानती आँसू ज़रा सा पानी है

डूब जाते हैं उम्मीदों के सफ़ीने इस में, मैं नहीं मानती आँसू ज़रा सा पानी है

क्या लिखूं हकीकत-ए-दिल आरज़ू बेहोस है, खत पर आँसू बह रहे हैं कलम खामोश है।

क्या लिखूं हकीकत-ए-दिल आरज़ू बेहोस है, खत पर आँसू बह रहे हैं कलम खामोश है।

भीगी भीगी सी ये जो मेरी लिखावट है, स्याही में थोड़ी सी मेरे अश्कों की मिलावट है।

भीगी भीगी सी ये जो मेरी लिखावट है, स्याही में थोड़ी सी मेरे अश्कों की मिलावट है।

अधूरी हसरतो का आज भी इल्जाम हैँ तुम पर! अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत खत्म नहीँ होती!

अधूरी हसरतो का आज भी इल्जाम हैँ तुम पर! अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत खत्म नहीँ होती!

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