Aansu Shayari | आँसू शायरी

न जाने कितने आँसू बहाते हैं, हम तेरे इश्क में हर रोज, इतने आँसू पीकर भी ये इश्क प्यासा क्यों है ए खुदा।

न जाने कितने आँसू बहाते हैं, हम तेरे इश्क में हर रोज, इतने आँसू पीकर भी ये इश्क प्यासा क्यों है ए खुदा।

दिले नादान को समझाए कैसे मोहब्बत में ये तो होना ही था, तूने दिल लगाया अमीरों से आंखो को तो गीला होना ही था।

दिले नादान को समझाए कैसे मोहब्बत में ये तो होना ही था, तूने दिल लगाया अमीरों से आंखो को तो गीला होना ही था।

मत पूछो मेरे दिल का हालआपके दिल भी बिखर जाएँगे! इस लिए नही सुनाते अपने दिल का दर्द किसी को! ये सुनके तो तन्हाई के भी आँसू निकले!

मत पूछो मेरे दिल का हालआपके दिल भी बिखर जाएँगे! इस लिए नही सुनाते अपने दिल का दर्द किसी को! ये सुनके तो तन्हाई के भी आँसू निकले!

क्या लिखूं दिल की हकीक़त आरज़ू बेहोस है, खत पे आँसू बह रहे हैं और कलम खामोश है।

क्या लिखूं दिल की हकीक़त आरज़ू बेहोस है, खत पे आँसू बह रहे हैं और कलम खामोश है।

मोहब्बत के सपने वो दिखाते बहुत हैं, रातों में वो हमको जगाते बहुत हैं, मैं आँखों में काजल लगाऊ तो कैसे, इन आँखों को सब रुलाते बहुत हैं।

मोहब्बत के सपने वो दिखाते बहुत हैं, रातों में वो हमको जगाते बहुत हैं, मैं आँखों में काजल लगाऊ तो कैसे, इन आँखों को सब रुलाते बहुत हैं।

मत पूछोये इश्क कैसा होता है! बस यहीं समझ लीजिए जो रूलाता है ना उसे ही गले लगाकर रोने को जी चाहता है!

मत पूछोये इश्क कैसा होता है! बस यहीं समझ लीजिए जो रूलाता है ना उसे ही गले लगाकर रोने को जी चाहता है!

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है, उधर ही ले चलो कश्ती जहां तूफान आया है।

सुना है आज समंदर को बड़ा गुमान आया है, उधर ही ले चलो कश्ती जहां तूफान आया है।

तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा, हम चाहते ही क्या थे तुमसे तुम्हारे सिवा।

तुमने समझा ही नहीं और ना समझना चाहा, हम चाहते ही क्या थे तुमसे तुम्हारे सिवा।

ले लो वापस, ये आँसू ये तड़प और ये यादें सारी! नहीं हो तुम अगर मेरे, तो फिर ये सज़ाएं कैसी!

ले लो वापस, ये आँसू ये तड़प और ये यादें सारी! नहीं हो तुम अगर मेरे, तो फिर ये सज़ाएं कैसी!

मीठी यादों से गिर रहा था ये आँसू, फिर भी न जाने क्यों यह खारा था।

मीठी यादों से गिर रहा था ये आँसू, फिर भी न जाने क्यों यह खारा था।

हुए जिस पर मेहरबान तुम कोई खुशनसीब होगा, मेरी हसरतें तो निकली मेरे आँशुओं में ढलकर।

हुए जिस पर मेहरबान तुम कोई खुशनसीब होगा, मेरी हसरतें तो निकली मेरे आँशुओं में ढलकर।

अपने ही हाथों से जला दिया अपना घर, कहना उससे और एक काम तेरा कर दिया।

अपने ही हाथों से जला दिया अपना घर, कहना उससे और एक काम तेरा कर दिया।

जब आपसे मिलने की उम्मीद नज़र आयी मेरे पाँव में ज़ंजीर नज़र आयी… गिर पड़े आँसू आँख से और हर एक आँसू में आपकी तस्वीर नज़र आयी।

जब आपसे मिलने की उम्मीद नज़र आयी मेरे पाँव में ज़ंजीर नज़र आयी… गिर पड़े आँसू आँख से और हर एक आँसू में आपकी तस्वीर नज़र आयी।

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