Aansu Shayari | आँसू शायरी

क्या कहूँ दीदा-ए-तार ये तो मेरा चेहरा है, संग कट जाते हैं बारिश की जहाँ धार गिरे।

क्या कहूँ दीदा-ए-तार ये तो मेरा चेहरा है, संग कट जाते हैं बारिश की जहाँ धार गिरे।

गिरना था जो आपको तो सौ मक़ाम थे, ये क्या किया कि निगाहों से गिर गए।

गिरना था जो आपको तो सौ मक़ाम थे, ये क्या किया कि निगाहों से गिर गए।

एक जिसकी मुस्कुराहट कर दे हरसू रौशनाई। वो अाज आँसू बन कर उसकी आँखो से है छलक आई।।

एक जिसकी मुस्कुराहट कर दे हरसू रौशनाई। वो अाज आँसू बन कर उसकी आँखो से है छलक आई।।

वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए, ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता।

वैसे तो एक आँसू ही बहा के मुझे ले जाए, ऐसे कोई तूफ़ान हिला भी नहीं सकता।

दो घड़ी दर्द ने आँखों में भी रहने न दिया हम तो समझे थे बनेंगे ये सहारे आँसू।

दो घड़ी दर्द ने आँखों में भी रहने न दिया हम तो समझे थे बनेंगे ये सहारे आँसू।

दर्द कितना है बता नहीं सकते, ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते, आँखों से खूद समझ लो आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते…

दर्द कितना है बता नहीं सकते, ज़ख़्म कितने हैं दिखा नहीं सकते, आँखों से खूद समझ लो आँसू गिरे हैं कितने गिना नहीं सकते…

रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं, आँखों में आँसू आयें ये ज़रूरी तो नहीं।

रोने वाले तो दिल में ही रो लेते हैं, आँखों में आँसू आयें ये ज़रूरी तो नहीं।

बस ये हुआ के उसने तकल्लुफ से बात की, और हमने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए।

बस ये हुआ के उसने तकल्लुफ से बात की, और हमने रोते रोते दुपट्टे भिगो लिए।

कुछ अंदाज़ मोहब्बत के भी होते हैं, जागती आँखों के भी कुछ ख्वाब होते हैं, गम में ही आँसू निकलें जरुरी नहीं, सैलाब मुस्कुराती आँखों में भी होते हैं।

कुछ अंदाज़ मोहब्बत के भी होते हैं, जागती आँखों के भी कुछ ख्वाब होते हैं, गम में ही आँसू निकलें जरुरी नहीं, सैलाब मुस्कुराती आँखों में भी होते हैं।

वो नदियां नहीं आँसू थे मेरे जिनपर वो कश्ती चलाते रहे, मंज़िल मिले उन्हें ये चाहत थी मेरी इसीलिए हम आँसूबहाते रहे…

वो नदियां नहीं आँसू थे मेरे जिनपर वो कश्ती चलाते रहे, मंज़िल मिले उन्हें ये चाहत थी मेरी इसीलिए हम आँसूबहाते रहे…

आंसुओसे पलके भिगा लेता हूँ! याद तेरी आती है तो रो लेता हूँ! सोचा की भुलादु तुझे मगर! हर बार फ़ैसला बदल देता हूँ!

आंसुओसे पलके भिगा लेता हूँ! याद तेरी आती है तो रो लेता हूँ! सोचा की भुलादु तुझे मगर! हर बार फ़ैसला बदल देता हूँ!

दिल में हर राज़ दबा कर रखते हैं, होंठों पे मुस्कुराहट सज़ा के रखते हैं, यह दुनिया सिर्फ ख़ुशी में साथ देती है, इसलिए हम अपने आँसुओं को छुपा कर रखते हैं।

दिल में हर राज़ दबा कर रखते हैं, होंठों पे मुस्कुराहट सज़ा के रखते हैं, यह दुनिया सिर्फ ख़ुशी में साथ देती है, इसलिए हम अपने आँसुओं को छुपा कर रखते हैं।

मुझे मालूम है तुमने बहुत बरसात देखी है, मगर मेरी इन्हीं आँखों से सावन हार जाता है।

मुझे मालूम है तुमने बहुत बरसात देखी है, मगर मेरी इन्हीं आँखों से सावन हार जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published.